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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे....हर बरस मेले...!!!

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सेवा देश दी जिंदडीए बड़ी औखी, गल्लां करनियाँ बहुत सुखल्लियाँ ने,
जिन्ना देश सेवा विच पैर पाया, उन्ना लाख मुसीबतां झल्लियाँ ने.

kartar[1]

भरपूर जवानी की उम्र में ही देश के लिए कुर्बान होने वाले महान शूरवीर करतार सिंह सराभा का जन्म गाँव सराभा जिला लुधियाना में 24 मई 1896 को सरदार मंगल सिंह के घर हुआ. छोटी उम्र में ही पिता का देहांत होने पर दादा बदन सिंह ने ही इनका पालन पोषण किया. प्राथमिक शिक्षा गाँव में ही स्थित स्कूल में प्राप्त करने के बाद लुधियाना के मालवा खालसा हाई स्कूल से आठवीं और मिशन हाई स्कूल से दसवीं की शिक्षा प्राप्त की. उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इनके दादा ने इन्हें अमेरिका में संफ्रंसिस्को स्थित बर्कले यूनीवर्सिटी में दाखला दिला दिया.
उस समय अमेरिका में रहने वाले भारतियों ने ग़दर पार्टी का गठन किया हुआ था, इस पार्टी के पहले प्रधान बाबा सोहन सिंह भकना और सक्रेटरी लाला हरदयाल जी थे,
करतार सिंह भी इस पार्टी के मेम्बर बन गए, उन्ही दिनों पार्टी ने ‘ग़दर’ नाम का अखबार छापना शुरू किया, करतार सिंह को ही इस अखबार के लिए धन इक्कठा करने की जिम्मेवारी सौंपी गयी, और इस जिम्मेवारी को पूरा करने के लिए, उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी की पड़ाई भी अधूरी छोड़ दी,
(उस समय विदेशों में रहने वाले भारतियों ने (विशेषकर सिखों ने) अखबार चलाने और हथियार इकट्ठे करने के लिए अपनी ज़मीं जायदाद को भी दांव पर लगा दिया था)
इस समय अंग्रेजों और जर्मनों में विरोध काफी बढ गया था, और किसी भी वक़्त युद्ध छिड सकता था. गदर पार्टी ने भी अपने नोज़वानो को हथियार चलाने और आवश्यक सैनिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया.
करतार ने भी न्यूयार्क की एक हवाई ज़हाज बनाने वाली कम्पनी में ज़हाज उड़ाने और मरम्मत करने का काम सीख लिया.
25 जुलाई 1914 को प्रथम विश्व युद्ध छिड गया.
5 अगस्त 1914 को गदर अखबार में हिन्दुस्तानियों की तरफ से अंग्रेज सामराज्य के विरुद्ध जंग का एलान कर दिया गया. करतार सिंह सराभा, रघुबर दयाल गुप्ता के साथ जापान के समुंदरी जहाज ”निप्प्न्मारू” द्वारा 15 सितम्बर 1914 को कलकत्ता आ गए. डिफेन्स ऑफ़ इंडिया एक्ट लगा होने के बावजूद करतार सिंह पुलिस से बच कर पंजाब पहुँच गए.
यहाँ उन्ह्नोने पहले अमृतसर और बाद में लाहौर में गदर पार्टी के अड्डे कायम किये. जिसमें बहन सत्यवती और माई गुलाब कौर ने बहुत मदद की. करतार सिंह की कोशिशों के फलस्वरूप गदर पार्टी का सम्बन्ध बंगाल के इनक्लाबियों के साथ जुड़ गया.और 1911 में वायसराय लोर्ड हार्डिंग के काफले पर बम फेंकने वाले इंकलाबी रास बिहारी बोस लाहौर ही पहुँच गए.
पंजाब में गदर पार्टी का मुख्य कार्य छावनीयों में फौजियों को बगावत के लिए तैयार करना, और क्रांतिकारियों के साथ मेल-जोल बढाना था, करतार सिंह ने यहाँ पर गदर पार्टी का प्रचार किया, ऊपर लिखी हुई दो लाइन उनकी कविता से हैं, जो वो अक्सर ही गुनगुनाया करते थे.
सेवा देश दी जिंदडीए बड़ी औखी, गल्लां करनियाँ बहुत सुखल्लियाँ ने,
जिन्ना देश सेवा विच पैर पाया, उन्ना लाख मुसीबतां झल्लियाँ ने.

लाहौर में ही किरपाल सिंह नाम के एक गद्दार ने पार्टी की सारी सूचना पुलिस को दे दी, ग्रिफ्तारी और पकड़-धकड़ का सिलसिला शुरू हो गया. करतार सिंह अपने साथी हरनाम सिंह टुंडीलाट और जगत सिंह सुरसिंघिया के साथ भेष बदल कर रात की ट्रेन से लायलपुर चले गए,
करतार सिंह और उनके दोनों साथी सरगोदा में अपने मित्र राजिन्द्र सिंह से हथिआर प्राप्त करने के लिए गए तो उसने रिसालदार गंडा सिंह की मदद से इन तीनो को ग्रिफ्तार करवा दिया.
अदालत ने करतार सहित 24 गदरियों को फांसी, 27 को उम्रकैद, और बाकी को कालेपांनी की सजा सुनाई, इन सजाओं से सारे देश में हलचल मच गयी. सरकार ने 24 में से 17 गदरियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया. करतार सिंह को फांसी की सजा 13 सितम्बर को सुनाई गयी, करतार ने जज का धन्यवाद करते हुए कहा, ‘मैं दोबारा पैदा हो के फिर से देश की आज़ादी के लिए लड़ाई करूंगा”
करतार सिंह और उसके 6 साथियों को 16 नवम्बर 1915 को लाहौर सेन्ट्रल जेल में फांसी दे दी गयी.
फांसी के वक़्त करतार सिंह की उम्र 20 साल थी,
भारत के इतिहास में इस शूरवीर का नाम सदा ही सुनहरी अक्षरों में लिखा रहेगा.



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35 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lenna के द्वारा
October 17, 2016

Gosh, I wish I would have had that intmfoarion earlier!

amanatein के द्वारा
January 5, 2013

आदरनिये विक्रमजी, कैसे है आप? आशा है की एकदम सकुशल. बहुत दिनों से आपका कोई लेख या सुन्दर सी कविता पढने को नहीं मिली. आशा है आप जल्दी ही इसे आरम्भ करेंगे. अमानत.

October 30, 2012

बस इंतजार है नमन

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय हिमांशु जी…..सादर…. इंतज़ार खत्म हुआ…….हम हाज़िर हैं…… देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

seemakanwal के द्वारा
October 10, 2012

शत -शत नमन .

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीया सीमा जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगी…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

rekhafbd के द्वारा
October 2, 2012

विक्रम जी सेवा देश दी जिंदडीए बड़ी औखी, गल्लां करनियाँ बहुत सुखल्लियाँ ने, जिन्ना देश सेवा विच पैर पाया, उन्ना लाख मुसीबतां झल्लियाँ ने. शहीद करतार सिंह और उनके शहीद साथियो को नमन ,जय हिंद

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीया रेखा जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगी…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 24, 2012

शूरवीर करतार सिंह को नमन ..और आप का आभार उनकी यादों को हमारे दिलों तक पहुँचाने के लिए …भारत माँ को ऐसे लोगों की बहुत जरुरत है …..ये सदा के लिए अमर रहेंगे …. जय हिंद भ्रमर ५

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

    Jeanette के द्वारा
    October 17, 2016

    I changed my account to director status via my channel profile. Then uploaded a program our astronomy club produces on Cable Access. These shows are basically public domain and I had pessirmion to upload this to Youtube. I did it. It uploaded was supposedly processed and when I went to look at it was told the video was deleted because it was to long.Video encode was over 100 megs in size for the uploaded video to be processed. I uploaded an M4v file of about 160 megs in size. The upload seemed to work. The encode may have but apparently they have the 10 minute limit and no way to get around it.

shashibhushan1959 के द्वारा
September 22, 2012

आदरणीय विक्रम जी, सादर ! महान शूरवीर करतार सिंह सराभा को मेरा हार्दिक नमन ! ऐसा जज्बा अब कहाँ ?

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय बड़े भाई शशि जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

September 22, 2012

वतन पर मिटनेवालोँ का यहीँ बाकी निशां होगा.. :-)

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय वर्मा जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

Santosh Kumar के द्वारा
September 22, 2012

विक्रम भाई ,.सादर नमस्कार बहुत अच्छे लेख के लिए ह्रदय से आभार आपका ,..कम ही लोग जानते होंगे की शहीद करतार सिंह सर्राभा सरदार भगत सिंह के प्रेरणास्त्रोत भी थे ,…देश रक्षा के लिए अपनी आहुति डालने वाले महान शहीदों को कोटि कोटि प्रणाम वन्देमातरम

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय संतोष जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
September 22, 2012

भाई साहब , बहुत ही ह्रदयस्पर्शी आलेख के लिये बधाई ,,,,

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय अनुराग जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
September 22, 2012

स्नेही नाती श्री, शुभासिश. इतनी अछि पोस्ट हेतु हार्दिक बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय नाना श्री……सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

bharodiya के द्वारा
September 22, 2012

ईन का नाम सुनहरी अक्षरों में लिखा जाना चाहिए लेकिन कोंग्रेसियों ने नही लिखा तभी हम को मालुम नही था । करतार सिंह के परिचय के लिए धन्यवाद ।

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय भरोदिया जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

akraktale के द्वारा
September 22, 2012

विक्रमजीत जी                 सादर, शहीद करतारसिंह साराभा जी के क्रांतिकारी जीवन पर आलेख लिखने के लिए बधाई. इससे मुझे कई नयी जानकारियाँ प्राप्त हुई. मगर बहुत दुखद किन्तु सत्य है कि आज हिन्दुस्तान में ऐसे जोशीले रक्त बीज नहीं बचे हैं.जों देशप्रेम कि खातिर आतंरिक संघर्ष में जीवन दांव पर लगा दें.

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय अशोक जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

nishamittal के द्वारा
September 22, 2012

काश सरकारी व्यवस्था ऐसे महँ वीरों की कथाएं पाठ्क्रम में सम्मिलित करती .बहुत अच्छा प्रयास

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय मातेश्वरी …..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगी…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

jlsingh के द्वारा
September 22, 2012

विक्रमजीत सिंह जी, नमस्कार ! बहुत ही अच्छी जानकारी उपलब्द्ध कराई आपने आजकल के युवा केवल फेसबुक पर ही देशभक्ति का परिचय देते हैं और सरदार मनमोहन सिंह के बारे में क्या कहा जाय…….

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय जवाहर जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

    Florence के द्वारा
    October 17, 2016

    Tutti noi lo facciamo, sentiamo un nome che non conosciamo o riceviamo una mail da uno sconosciuto e subito a googlare per trovare una foto, una biografia, qualcosa che ci permetta di contestualizzare la determinata persona e capire chi ci troviamo di fronte. Quindi possiamo immaginare quanto questo strumento venga utilizzato dagli uffici di placement. Un sintomo derl#&8217;impoltanza della web reputation è il fatto che esistano strumenti che permettono di ottimizzare e monitorare la nostra reputazione online: qui un post con parecchi link.

Rahul Nigam के द्वारा
September 21, 2012

विक्रमजीत सिंह जी, गुमनामी के अंधेरो से भूले बिसरे शहीदों को रौशनी मे लाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. मुझे इस शूरवीर के बारे में कोई मालूमात नहीं थी. बहुत बहुत धन्यवाद दुर्लभ जानकारी के लिए.

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय राहुल जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 21, 2012

विक्रम जी। एक देशभक्त क्रांतिकारी के बारे में जानकारी देने को शुक्रिया।

    vikramjitsingh के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरणीय भानु जी…..सादर…. देरी से जवाब देने के लिए क्षमा-प्रार्थी हैं……उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगे…../// प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…….


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