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कौन कहता है..हम गरीब हैं......???

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भारत के भ्रष्ट नेताओं, अमीर घरानों और बड़े-बड़े अफसरों द्वारा विदेशी बैंकों में अवैध रूप से जमा किया हुआ धन ही काला धन है, लेकिन इस काले धन का एक दूसरा पहलू भी है, जो पूरी तरह सफ़ेद होकर अपने भारत देश में ही रखा हुआ है, लेकिन चंद लोगों के सिवा यह धन किसी और के काम नहीं आ रहा. या ये कहें कि ‘काम आने नहीं दिया जा रहा’.
कुछ लोग अपना काला धन / फालतू धन पूजाघरों को दान में दे देते हैं क्योंकि उनका विचार है की इस से उनका लोक और परलोक दोनों सुधर जायेंगे. यह दान किया हुआ धन धर्मस्थानों, धर्मगुरुओं के पास यां ड़ेरों पर पड़ा रहता है जहाँ इसका कोई प्रयोग नहीं किया जाता अथवा गलत प्रयोग किया जाता है. क्या इस धन को उत्पादक कार्यों में नहीं लगाया जा सकता था? लेकिन उलटे इसकी सुरक्षा करने के लिए सरकारी खजाने के ऊपर अतिरिक्त बोझ पड़ता है. विश्व के सबसे अमीर धर्मस्थानों में भारत का पहला नम्बर है, इसकी दूसरी तरफ देखा जाये तो विश्व के सबसे अधिक गरीब भारत के अन्दर ही रहते हैं, भूखमरी के शिकार 50 % लोग भारत में ही पाए जाते हैं.
चलिए, मुद्दे की बात पर आते हैं,
केरल के स्वामी पद्मनाभन मंदिर के 6 तहखानो में से 5 तहखानो को खोलने के पश्चात, 100,000 करोड़ के हीरे, सोना और जवाहरात प्राप्त हुए हैं. इस अनमोल खजाने के कारण पदमनाभन मंदिर, तिरुपति बाला जी मंदिर को पछाड़ कर पहले नम्बर पर चला गया है. तिरुपति बाला जी मंदिर वो मंदिर है जिसमें रोजाना 3 से 4 करोड़ रूपये का माथा ही टेक दिया जाता है, इस रकम को बोरियों में भरने और गिनती करने के लिए दर्ज़नो कर्मचारी तैनात रहते हैं. इस मंदिर में सालाना 350 किलो सोना (लगभग) और 5000 किलो चांदी (लगभग) का माथा टेका जाता है. वर्ष 2010 में इस मंदिर को 600 करोड़ रुपए की धनराशि चडावे के रूप में प्राप्त हुई. 2010 में इस मंदिर के पास 50 ,000 करोड़ रुपए की सम्पति का अनुमान लगाया गया था. जबकि इससे पहले 2008-09 में इस मंदिर का सालाना बजट ही 1925 करोड़ रुपए का था.
इस के इलावा, केरल का ही गुरुवयूर मंदिर, शिर्डी का साईं बाबा मंदिर,, मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर, जम्मू का वैष्णो देवी मंदिर, गांधीनगर का अक्षरधाम मंदिर, पूरी का जगन्नाथ मंदिर, कोलकाता का कालीमाता मंदिर और अमृतसर का स्वर्ण मंदिर, इतने अमीर मंदिर हैं कि इनकें भरा हुआ सोना, रिज़र्व बैंक के कुल सोने से भी ज्यादा है.
ये तो बात हुई कुछ मंदिरों की, अब बात करें कुछ धार्मिक गुरुओं / बाबाओं / स्वामियों की, देखें ज़रा उनके पास क्या है. इन बाबाओं / स्वामियों की धन-दौलत कितनी है, इसके बारे में हमेशा ही भ्रम रहा है. गोलमोल तरीके से एक बार बाबा रामदेव ने अपनी सम्पति का जिक्र करते हुए कहा था उनके पास दान में मिली राशि और दवाईयां बेच कर मिली धनराशि से उन्होंने चार ट्रस्ट बनाये हैं, जिनकी कुल सम्पति 426.19 करोड़ रुपए है, इस ब्यान में किसी भी कंपनी या ट्रस्ट का ज़िक्र नहीं था. दुसरे मायनो में ये बाबा / स्वामी भगवे और सफ़ेद चोलों में सजे हुए व्यापारी हैं. अप्रत्यक्ष रूप में यह बाबा/स्वामी बड़े-बड़े व्यापारिक संस्थानों के कर्ता-धर्ता हैं, बड़े-बड़े व्यापारियों के सलाहकार हैं, उनके घरेलू विवाद सुलझाने वाले हैं क्योंकि इनकी स्त्रियों के ऊपर इन बाबाओं की पकड़ बहुत मजबूत है. ये बाबा/स्वामी सरकारों के फैसलों को भी प्रभावित करते हैं और कई तो सरकारी कामों में सीधी दखलंदाज़ी तक करते हैं. और ऐसे कृत्यों के कारण इनको मिलती है प्रसिद्धी और चेलों की फौज, जिससे धन-दौलत की वर्षा होती है इन बाबाओं/स्वामियों के ऊपर.
अख़बारों की मानें तो, बाबा रामदेव की कंपनियां प्रति मिनट 3000 रुपए का कारोबार कर रही हैं. इनकी कुल सम्पति 1200 करोड़ रुपए है. बाबा के भक्त इनके उत्पादों से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं और केवल बाबा के उत्पादों/दवाइयों की खरीद करना ही अपना धर्म मानते हैं. टीवी चैनल ‘आस्था’ में बाबा के करीबी आचार्य बालकृष्ण के 99.5% शेयर हैं, जबकि बाबा की एक कंपनी ‘पतंजलि आयुर्वेद’ में बालकृष्ण के 310 करोड़ रुपए के शेयर हैं, जो की वास्तव में बाबा रामदेव के ही हैं. बाबा की दूसरी कम्पनियां ‘दिव्या फार्मेसी’ और ‘पतंजलि फ़ूड हर्बल पार्क’ क्रमश 300 और 500 करोड़ रुपए की कंपनियां हैं. स्कॉट्लैंड में ‘सैम और सनीता’ नामक दम्पति ने बाबा को एक टापू दान में दिया है, जहाँ बाबा जी योगा कैंप लगायेंगे और करोड़ों कमायंगे. जबकि सैम और सनीता दान देने का पाखंड रच के बाबा के बिजनेस में 7.2% के हिस्सेदार बन चुके हैं. और वहां की सरकार को बेवकूफ बना के करोड़ों रुपए टैक्स की चपत लगा रहे हैं.
ख़ुशी से झूमते हुए बाबा के एक चेले (यहाँ नाम देना ठीक नहीं) ने बताया कि बाबा जी कि मेहरबानी से हमारा बिजनेस दिन दूनी और रात चोगुनी तरक्की कर रहा है, और हम जल्दी ही पूरी दुनिया की मार्केट पर कब्ज़ा कर लेंगे. सिर्फ एक वर्ष पहले ही बाबा ने हरिद्वार में 125 एकड़ में 500 करोड़ की लागत से पतंजलि फ़ूड हर्बल पार्क स्थापित किया है. और इस पार्क का निर्माण अमरीकी स्टायल से किया गया है. यहाँ बताने की आवश्यकता नहीं की बाबा की नज़रें अब अमरीका के बाज़ार पर हैं. ये तो बात हुई, आज के सबसे चर्चित बाबा की, आइये अब आगे चलें………
काली-सफ़ेद दाड़ी, मोटी आखें, माथे पर चन्दन लेप लगाने वाले तांत्रिक चन्द्रास्वामी याद हैं आपको, उनके शिष्यों में दिवंगत प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव, चन्द्र्शेखेर, ब्रुनई के सुल्तान, हथियार व्यापारी अदनान खुशोगी, भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और अदाकारा एलिज़ाबेथ टेलर भी शामिल रहे हैं. इस स्वामी को 1996 में लन्दन के एक व्यापारी लखुभाई पाठक से 100 ,000 डॉलर की ठगी मारने के जुर्म में ग्रिफ्तार किया गया था.
‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ संस्थान के संस्थापक श्री श्री रविशंकर, बाबा रामदेव के परम मित्र, जिन्होंने बाबा का अनशन भी तुडवाया था, का आर्ट ऑफ़ लिविंग आश्रम बंगलौर के नजदीक 70 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें रिहायशी मकान, हस्पताल, ऑफिस आदि बने हुए हैं. पूरे विश्व में इस संस्थान की 3000 शाखाएं खुली हुई हैं, जिनमें से कुछ अमरीका और दक्षिण अफ्रीका में भी हैं, यह संस्थान किताबें और दवायें बेच कर हर साल मोटा मुनाफा कमाता है.
सत्य साईं बाबा की मौत के बाद उनकी धन दौलत का विवरण देते हुए मीडिया की रिपोर्ट है कि बाबा लगभग 40,000 करोड़ रुपए के विशाल साम्राज्य के मालिक थे. उनका आश्रम पुटपर्थी में 70 एकड़ में फैला हुआ है, जिस में, निजी हवाई पट्टी,शिक्षा संस्थान, बाग़-बगीचे बने हुए हैं, इसके इलावा 300 बिस्तर का हस्पताल जो 2001 में 130 करोड़ की लागत से बनाया गया था. इसके इलावा इस संस्थान कि 167 देशो में शाखाएं भी चल रही हैं….यही नहीं…….हर तीन वर्ष के बाद……सत्य साईं मंदिर की तिजोरी को खोल कर उसमें रखे गहनों की नीलामी भी की जाती है…ये खज़ाना वही होता जो चढ़ावे के रूप में भक्तों से प्राप्त होता है….इस बार भी 280 किलो सोना और 3200 किलो चांदी की नीलामी की जा रही है.
अब आइये, हरियाणा में चलें, सिरसा के डेरे का नाम तो काफी सुना होगा आपने, अक्सर ही यह डेरा, अपने बाबाओं के कृत्यों, और करोड़ों के कारोबार के कारण, अख़बारों की सुर्ख़ियों में छाया रहता है.
वहीँ पंजाब का डेरा ब्यास, जो इतना विशाल है, की इसमें 7000 रिहायशी मकान, बिजलीघर, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, निजी हवाई पट्टी, के इलावा फल, सब्जियों, और अनाज का प्रचुर मात्रा में उत्पादन किया जाता है. यहाँ एशिया का सबसे बड़ा पंडाल है, जिसमें 250,000 लोग इकट्ठे बैठ कर लंगर (भोजन) खा सकते हैं. लेकिन सिर्फ डेरे के श्रद्धालु, आम लोग नहीं.
ये तो थे कुछ गिने चुने बाबा, जो माया (धन-दौलत) को काली नागिन कहते हैं. और खुद गले तक इस अंधी दलदल में धंसे हुए हैं. इन्होने कभी टैक्स नहीं दिया, कभी टेलिफोन/बिजली का बिल नहीं दिया. लेकिन हर धर्मस्थान/डेरे में 2-4 एयरकंडीशनर, स्कोडा और टयोटा गाड़ियाँ आम मिल जाएँगी. पूरे देश में ऐसे कई धर्मसंस्थान/डेरे हैं जहाँ अथाह दौलत पड़ी हुई है, किसी काम की नहीं, लेकिन भारत का आम नागरिक आज भी दैनिक 32/- रुपए (केद्र सरकार के अनुसार) में गुजारा करने के लिए विवश है!!!

तो आप ही बताएं….क्या हम गरीब हैं…..??? जी नहीं.!
हाँ…. विवश ज़रूर हैं….!!!



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62 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Luck के द्वारा
October 17, 2016

This artilce went ahead and made my day.

Subrang के द्वारा
February 4, 2014

यह कमीने बाबाओं कि सारी हड़पी हुई दोलत छीन कर इन को नंगा करके पेड़ से बांध कर मुहं काला करके जूतेमारने कि इच्छा है। साथ में भारत देश के सारे कमीने राजनेताओं को भी हरामखोर इंसान

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 17, 2012

बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये. बहुत सराहनीय प्रस्तुति.

    Jobeth के द्वारा
    October 17, 2016

    It’s a plreause to find someone who can think so clearly

westscott के द्वारा
September 17, 2012

नमस्ते आप अपने व्यापार, कार खरीदने के लिए अपने घर के लिए वित्तपोषण की जरूरत है, मोटर साइकिल खरीदने के लिए अपना खुद का व्यवसाय बनाने के लिए, अपने निजी जरूरतों के लिए हम 1000 € से 3% की ब्याज दर पर अच्छी तरह से अध्ययन के साथ अधिक क्रेडिट € 80 करोड़ दे. अपने ऋण आवेदन पत्र में सही राशि है कि आप चाहते हैं और चुकौती अवधि निर्दिष्ट करें. कृपया मुझे मेल से संपर्क करें: westscottloancompany@gmail.com शुक्रिया

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 17, 2012

    धन्यवाद महोदय………

pitamberthakwani के द्वारा
September 16, 2012

विक्रम जीत जी, आपने न जाने कितनी मेहनत कर ये आंकड़े इकठे किये होंगे?आप को बहुत धन्यवाद.आपके लेख की सारी बातें सही हैं हमें तो यह बहूत ही अछा लगा. एक चल और एक अचल सम्पति होती है यह आप जानते ही होंगे! यह सम्पति जो आपने गिनाई है यह अचल है इसके होने से हमारा देश भले ही अमीर हो पर क्या ऐसा सही है? हम बिलकुल तब तक कंगाल कहे और माने जायेंगे जब तक मेरा पड़ोसी भूखा सोता है ,उसके बच्चे पैसे के अभाव में स्कूल नहीं जा सकते,इलाज के बिना मर जाते है.यह तो ऐसे हुआ जैसे तिजोरी में बाप के पास पैसा तो बहुत है पर मैं बेटा हो कर भी हाथ नहीं लगा सकता .हमारे मंदिरों की सम्पति तो बहुत है,हमारे बाबाओं की आमदनी तो बहुत है,सोना यूं ही पडा है पर जनता भूखी सोती है फिर हम,हमारा देश कैसे संपन्न हुआ? वही हुआ की – ” सारा जहां हमारा पर रहने को घर ही नहीं है.माल सब हमारा हा पर हम उसे हाथ नहीं लगा सकते? हमन्याया सह कर कुछ कर ,कह नहीं सकते तो हम दीवार पर टंगी उस तसवीर की तरह नहीं हुए , जो न बोल सकती है और न ही हिल सकती है? बाबा राम देव हो हल्ला करते हैं क्यों नहीं पहले अपना धन किसी उत्पाद में लगा कर उधाहरण पेश नहीं करते?

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 17, 2012

    आदरणीय पीताम्बर जी…..सादर….. आपका प्रश्न उचित है…. लेकिन इस का उत्तर तो रोज़ अख़बारों – टीवी पर आ रहा है…….. शायद आपको पता हो……ये बिलकुल वैसा ही है……जैसा विदेशों में पड़ा हुआ ‘काला धन’ जो हमारा होते हुए भी किसी काम का नहीं……अगर वो काला धन इस देश में वापिस आ जाए तो……..क्या नहीं हो सकता…..दूर क्या जाना……अभी की बात करते हैं…..क्या आप जानते हैं….एक साल में 6 सिलेण्डर सब्सिडी वाले और उसके बाद बाज़ार भाव का सिलेण्डर लेने से केंद्र सरकार को 23,000 करोड़ की आमदन होगी……..सिर्फ 23,000 करोड़…….और देखिये तो……विदेशों में भारत का 480 लाख करोड़ रूपया बट्टे खाते में पड़ा है…….आप सोच सकते हैं…..इतनी रकम से क्या नहीं हो सकता……….??? दूसरे शब्दों में यही कहा जायेगा…….कि देश की भृष्ट सरकार अगर ईमानदार हो जाये तो क्या नहीं हो सकता…..फिर आप का पडोसी भूखा नहीं सोयेगा….उसके बच्चे भी रोज़ स्कूल जायेंगे…….बस अगर आप साथ दें तो इन चोरों को पाठ पढ़ाने की आवश्यकता है……. उम्मीद है…आपकी जिज्ञासा का समाधान हो गया होगा……. सादर…….

    Maribeth के द्वारा
    October 17, 2016

    Nydelige armbÃ¥nd og deilige strømper for høst… lucky you!God søndag ønskes fra nanni i sofakroken med en kopp kaffe og ro…Ro til klokka Ã¥tte i kveld, men med VÃermlenga¥ann blir det nok Heia Enga… ;o)Klem

yamunapathak के द्वारा
September 14, 2012

vikram jee आपका यह ब्लॉग kai aankadon ke sath nayee jaankaaree दे गया.सच कहूँ तो प्राचीन युग में सोने की चिड़िया से जाना जाने वाला देश आज भी वही है क्योंकि प्राचीन काल में भी आम जनता परेशां थी पर राजकोष भरा था.कल यह युग भी स्वर्ण चिड़िया कहलाएगा.क्योंकि इतिहास सिर्फ धनिकों रजा महाराजों पर ही केन्द्रित हो लिखा जाता है . यह पूरा ब्लॉग जानकारी से परिपूर्ण है आपका अतिशय धन्यवाद

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 14, 2012

    आदरणीया यमुना जी…. आलेख का सटीक अवलोकन करने और उत्साहजनक प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार…..

vivek bhandari के द्वारा
September 14, 2012

बहुत अच्छा वर्णन दिया है आपने भाई साहेब,

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 14, 2012

    विवेक जी….आपका हार्दिक धन्यवाद……..

September 13, 2012

सादर प्रणाम! समय की मांग के अनुसार उपयुक्त और विश्लेष्णात्मक आलेख…………….अंधों को आख देता हुआ अगर वो लेना चाहें तो वरना……………………..जीवन गति तोरी तेवन गति मोरी रामा हो रामा…………..रामा कैसे मिति भारत से भ्रष्टाचरवा …………..रामा हो रामा………….चाहे जनता हो या जनार्दन……….सब इंहा चोरवा……………रामा हो रामा………………! रामा …नेता, अभिनेता, संत और लंठ…सब एक समनवा ..रामा हो रामा……………..रामा………राम के भेष में छुपल रावनवा ……………..रामा हो रामा……………………..! टिंग टांग…ताना नाना नंग……….पिचंग पिचंग पिचंग……………..हाँ…………..हाँ…..हाँ………………… जय हो भरता माता की ………..जय हो इस धरती के नमक हराम और नालायक सपूतों की …………………! इसी के साथ हरिकीर्तन ख़त्म हुआ………..एक बार प्रेम से बोलिए ………………..महान संस्कृति और सभ्यता वाले भारत भूमि की ……………………………………………

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 13, 2012

    प्रिय अनिल जी……कैसे हैं आप….??? आपकी वही पुरानी फोटो लगी देखी….तो दिल खुश हो गया……लगता है आपने अपने पूरे जाहो-जलाल के साथ दोबारा पदार्पण कर दिया है मंच पर…….अच्छा लगा…..खूब गुजरेगी-जब मिल बैठेंगे तीन यार-आप-हम और मंच…….. हार्दिक स्वागत और धन्यवाद भी…… (कोई एक-एकाध रचना भी डाल देते मंच पर…..बहुत दिन हो गए अब तो…..)

    September 13, 2012

    ठीक हूँ भैया जी………………….जी मैं आज भी वैसा ही हूँ जैसा कल था हाँ परन्तु मानसिक और बौद्धिक विकास में लगा हुआ हूँ……………………………… खूब गुजरेगी-जब मिल बैठेंगे तीन यार-आप-हम और मंच……..जी बिलकुल, सही फ़रमाया आपने……………………… रचना तो नहीं किन्तु एक आलेख पोस्ट किया हूँ………………अवलोकन करना चाहें……………. http://merisada.jagranjunction.com/2012/09/13/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D-%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%9C/ आने वाले दिनों में अन्जानी को लेकर एक ठोस कदम उठाना चाहूँगा………….जिसमे हम दोनों को आप सभी के प्यार और आशीर्वाद की अपेक्षा रहेगी………………एक बार फी आपका हार्दिक आभार………………..

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 13, 2012

    सुनकर ख़ुशी हुई अनिल जी…… हमारा सहयोग आप को हमेशा मिलता रहेगा….. धन्यवाद….

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
September 13, 2012

विक्रम जी नमस्कार ,बहुत ही अच्छा आलेख लिखा है कौन कहता है कि हम गरीव है ,,एक आम आदमी ही गरीब हैजिसको 32 रुपया प्रतिदिन मिलता है बाकी सब अमीर ,,,

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 13, 2012

    आदरणीय अनुराग जी…..नमस्कार….. आप का स्वागत है……और हार्दिक धन्यवाद भी……

D33P के द्वारा
September 11, 2012

विक्रम जीत जी नमस्कार ,,,,,,,सही ही तो है हमारे देश में इंसान को बनाने वाला वाला इश्वर ही अमीर है ,इंसान अमीर कैसे हो सकता है ?ये त्रासदी है हमारे देश की ,पैसा बहुत है उसकी रखवाली की जा रही है पर उस पैसे से किसी गरीब का पेट नहीं भरता !उसी दरवाजे पर लोग भीख मांगकर पेट भरने को ,दुत्कार खाने पर मजबूर है !आज अमीर मंदिर में दान तो दे सकता है पर किसी गरीब के पेट भरने के लिए खर्च करने के लिए तैयार नहीं !शायद भगवान ज्यादा सशक्त है !

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 12, 2012

    आदरणीया दीप्ति जी…..सादर नमस्कार….. आपका कहना उचित है… सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद…..

Mohinder Kumar के द्वारा
September 11, 2012

विक्रम जी, सार गर्भित लेख.. निश्च्य ही हमारा देश गरीब नहीं अपित शोषण का मारा है जहां धर्म के नाम पर लोग लाखों का चंदा देते है पर भूखे को रोटी नहीं खिला सकते…ये वही लोग है जो अनाप शनाप ढंग से पैसा बटोरते हैं.

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 12, 2012

    आदरणीय मोहिंदर जी….सादर…. समर्थन के लिए आपका हार्दिक आभार…..

Chandan rai के द्वारा
September 10, 2012

विक्रम जी , एक बेहतरीन लेख के लिए हार्दिक अभिनन्दन स्वीकारें ! बहुत ही महत्त्व पूर्ण जानकारी से भरा लेख !

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    प्रिय चन्दन जी…. आपका हार्दिक धन्यवाद…..

rekhafbd के द्वारा
September 10, 2012

विक्रम जी ,आपने बहुत अच्छा मुद्दा उठाया है ,हमारे देश में अमीर गरीब में बहुत अन्तर है ,दूसरे मंदिरों भरे हुए खजाने है ,दौलत तो है लेकिन वह किस काम की ,विचारणीय आलेख ,बधाई .

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    सहमती के लिए सादर धन्यवाद…. आदरणीया रेखा जी…..

rajni के द्वारा
September 10, 2012

विक्रम जी, इतनी दौलत का करते क्या हैं?

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    जब भी पता लगेगा…..आपको अवश्य बताएँगे…. सादर… रजनी जी…..

    Evaline के द्वारा
    October 17, 2016

    es heißt ja viel spass beim raten, also rate ich mal:vl eine hyperkaliämie? (breiter QRS, hohes T)mit anschließender therapie und normalisierung des kalsgmspieueli/EKGs (z.b.: mit glukoselösung + insulin)VA:F [1.9.20_1166](from 6 votes)

ashishgonda के द्वारा
September 9, 2012

आदरणीय! संभव है कुछ लोग मेरी बात से सहमत न हों,,किन्तु मेरा मानना ये है कि जब दान की गई वस्तुओं का उपयोग भगवान भक्तों के लिए नहीं होता है तो हम ही क्यूँ न किसी पात्र को दान दे,,फिर वो चाहे ब्राम्हण हो या कोई निन्म जाति का हो. “मेरे दादा जी कहा करते थे, कि व्यक्ति को किसी मंदिर-मस्जिद जाने कि जरूरत नहीं वो घर पर पूजा-पाठ अपने श्रद्धानुसार कर सकता है, तो एक दिन मैंने पूंछा अगर जाने की जरूरत नहीं है तो फिर मंदिर क्यूँ बनाये गए? इस उन्होंने बहुत ही अच्छा उत्तर दिया जिसे मैं भी मानता हूँ,,मंदिर सिर्फ इसलिए बनाये गए ताकि जब व्यकि को कहीं पर्यटन करने का मन करेगा तो वह किसी मंदिर जाएगा और वहाँ बैठे गरीबों को कुछ दान करेगा, इससे वह पुन्य का भागी भी होगा और किसी गरीब का हित भी हो जाएगा. बहुत अच्छा लेख धन्यवाद…

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    प्रिय आशीष जी….. आपके आदरणीय दादा जी…..बिलकुल सही कहते थे….. प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद……

akraktale के द्वारा
September 7, 2012

विक्रम जीत जी भाई                           नमस्कार, बहुत ही सही बात आपने रखी हैं.यह रुपया सही तरह से देश के उपयोग में आये तो देश बहुत तरक्की कर सकता है. कई गरीबों के लिए रोजगार मुहय्या होगा. कई लोगों के टैक्स का बोझ कम हो सकता है. बहुत खूब.

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    आदरणीय अशोक जी….सादर… आपका कहना सत्य है……देश की कायापलट हो सकती है…… समर्थन के लिए आपका हार्दिक आभार…….

vinitashukla के द्वारा
September 7, 2012

अच्छा और सामयिक लेख. बधाई.

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    आदरणीया विनीता जी……सादर…. समर्थन के लिए आपका हार्दिक आभार……

yogi sarswat के द्वारा
September 7, 2012

सटीक लेखन के लिए और चुने गए विषय के लिए बधाई ! असल में ये कोई नयी बात नहीं है , हमारे पूजा स्थल पहले से ही सम्रध रहे हैं और समाज सेवा के लिए उन्होंने खूब खर्च भी किया है किन्तु आज , सब नहीं लेकिन अधिकांश का ये व्यापार सा हो गया है ! बेहतरीन लेख

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    आदरणीय योगी जी….. समर्थन के लिए हार्दिक आभार…..

dineshaastik के द्वारा
September 7, 2012

भाई विक्रम जी धर्म और राजनीति यह दो ऐसे क्षेत्र हैं लूटने के कि इसमें न तो लुटने वाला आह भर सकता है और न ही लूटने वाला का कोई कुछ बिगाड़ सकता है। वर्तमान परिवेश में इन दोनों क्षेत्रों में अपराधी प्रवृति के लोगों का अधिपत्य है। निराशाराम जैसे दबंग, अनिर्मल बाबा जैसे ठग, राम कीहींग जैसे बालात्कारियों का कोई कुछ भी नहीं विगाड़ सकता। यह सभी धर्मों में है। चूँकि हिन्दु धर्म में पारदर्शिता एवं एक तरह का लोकतंत्र है। अतः यहाँ सब बातें खुल जातीं हैं। और इनकी खुलकर आलोचना भी हो जाती है। कोई मसलमान इस्लाम के बारे में सच्चाई बोल कर देखे। आतंकवादी उसके सिर कलम करने के लिये इनाम लगा देंगी। अन्य धर्मों में इससे भी अनैतिकता, भ्रष्टाचार, अधर्म एवं झूठ है। हमारे धर्म का पैसा तो केवस अय्यासी में खर्च होता है। अन्य सम्प्रदायों का धन तो आतंकवाद एवं देशद्रोही कार्यों में खर्च होता। अभी हाल में मुम्बई में जो उत्पात हुआ उसमें धार्मिक फंड का इस्तेमाल किया गया था। मेरा मानना है कि वर्तमान परिवेश में यह धर्म ही मानव का सबसे बड़ा शत्रु है। क्या हम बिना धर्म के नैतिक एवं ईमानदार नहीं बन सकते?

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    आदरणीय दिनेश जी….सादर…. आप ने सही कहा….ये धांधली सभी धर्मों में हो रही है……तबी तो संसथान दिनों-दिन अमीर होते जा रहे हैं…… सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद…..

bharodiya के द्वारा
September 6, 2012

आप ने जो जो कंपनिया बताई उस से कोइ खास परिवार पलता है क्या ? समाज ही उस का परिवार है । समाज से लेते हैं समाज को देते हैं । संस्था को बडा होना हो तो पैसे और ईंफ्रास्टक्चर तो बन ही जाता है । बिना पैसे तो सेवा नही हो सकती । आपने साई के दवाखाने नही देखे । कितना सस्ता होता है जानिए ।

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    आदरणीय भरोदिया जी….. लगता है आपने पूरा आलेख नहीं पढ़ा…हम भी तो यही कह रहे हैं….”जो कुछ भी होता है….सस्ता होता है…..लेकिन भक्तों के लिए मुफ्त नहीं होता…..” और हाँ……जिस धर्मसंस्थान में कोई ऐसी सुविधा होती है…वो सिर्फ अपने श्रधालुओं तक ही सीमत होती है…..आम जनता के लिए नहीं…… जाने-अनजाने आपने हमारी बात का समर्थन ही किया……. धन्यवाद भरोदिया जी……

manoranjanthakur के द्वारा
September 6, 2012

बिलकुल गरीब नहीं हो सकते हम रातोरात आमिर जो बन गए है बढ़िया बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    आदरणीय मनोरंजन जी….. खुश-मिजाज़ आदमी कभी गरीब नहीं हो सकता….. सादर धन्यवाद….

drbhupendra के द्वारा
September 6, 2012

आपको जानकार आश्चर्य होगा की मंदिरों की कमाई का ६०% हिस्सा इस्लाम और इसाई धर्म के उत्थान में किया जा रहा है… वैसे लगता है की आप कभी पतंजलि योगपीठ गए नहीं है? एक बार जाइये और रहिये… मुह में ताला लग जाएगा बिलकुल मेरी तरह……

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    आदरणीय भूपेन्द्र जी…..सादर…. अगर ऐसा होता है तो ये दुखद है……आखिर वो ऐसे कृत्य कर के क्या साबित करना चाहते हैं….??? हमें कभी मौका नहीं मिला….. पतंजलि योगपीठ में जाने का…. आपने पूरे विस्तार से नहीं लिखा….ऐसा क्या होता है… पतंजलि योगपीठ में…….???

drbhupendra के द्वारा
September 6, 2012

आपको जानकार आश्चर्य होगा की मंदिरों की कमी का ६०% हिस्सा इस्लाम और इसाई धर्म के उत्थान में किया जा रहा है…

nishamittal के द्वारा
September 6, 2012

गरीब नहीं हैं आप मस्जिदों और चर्च की सम्पत्ति पर भी दृष्टिपात करिए विक्रम जी.ये धन यदि दान का है तो भगवान् का भक्तों के हितार्थ प्रयोग होना चाहिए.

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 11, 2012

    आदरणीया मातेश्वरी……सादर…. आपका कहना बिलकुल सत्य है…..लेकिन ये भक्तों के हितार्थ प्रयोग नहीं किया जाता बल्कि इसी चडावे को भक्तों में ही नीलाम करके उनसे मोटी कमाई की जाती है….. समर्थन के लिए आपका धन्यवाद…..

    Blaze के द्वारा
    October 17, 2016

    and also, why are we all seperate now? Cant we just share all the videos from all the wom.aDiscririndtionl.. racism?Boy you suck youtube, why changing something good? Do something dont be like microsoft ffs


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