Political

जो तुमको हो पसंद....वही बात कहेंगे........

15 Posts

763 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4644 postid : 411

प्यासे दरिया........

  • SocialTwist Tell-a-Friend

manmohanCartoon[1]
चलेंगे दहकते अंगारों पे, ये कह के आये हैं…….
उठा के खुद सलीबें बाजुओं पर ले के आये हैं….

………………………………………………………………………….

भला क्या मौत हमें दोस्तों कह कर डराएगी…..
हम तो जिंदगी की बदज़ुबानी सह के आये हैं….

………………………………………………………………………….

नहीं अब तेरे रहमो-करम पर दिन बसर करने….
हम उस उफनते दरिया को ये कह के आये हैं….

………………………………………………………………………….

ऐ हंकारी समुन्द्र तू जहाँ था अब भी वहीँ है…..
हम कतरे सही पर आसमां पे रह के आये हैं…..

………………………………………………………………………….

बहुत अभिमान था रातों को उनकी स्याही पर….
हम बांके….संधूरी लाल किरणें ले के आये हैं…..

………………………………………………………………………….

करो कोशिश….., पर हम को पी नहीं पाओगे…..
हम प्यासे दरिया..मरुस्थलों से बह के आये हैं….



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

54 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Justice के द्वारा
October 17, 2016

A little rationality lifts the quality of the debate here. Thanks for coibgntutinr!

Himanshu Nirbhay के द्वारा
September 1, 2012

वाह वाह| बार बार यही शब्द निकल रहे हैं…. वाह वाह

    vikramjitsingh के द्वारा
    September 2, 2012

    हिमांशु जी….आपका स्वागत है……और धन्यवाद भी…… ऐसे ही संवाद बना रहे……

    Mavrick के द्वारा
    October 17, 2016

    En bra &#Ã;212f8¶rsta vanlig fredag ” pÃ¥ er!En lunch med smÃ¥ söta bluffmakerskor lÃ¥ter mysigt.Jag ska luncha med farmor Carina och plocka lite tulpaner .Kram kram !

vivek bhandari के द्वारा
August 30, 2012

विक्रम जी, क्रांति लाने का इरादा है क्या!!!

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 30, 2012

    विवेक जी….. अगर आप साथ दें तो…..क्रांति भी आ जाएगी….!!

alkargupta1 के द्वारा
August 29, 2012

अति उत्तम भावाभिव्यक्ति विक्रमजीत जी

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 29, 2012

    आदरणीया अलका जी…… आपके हार्दिक आभारी हैं……

mparveen के द्वारा
August 29, 2012

करो कोशिश….., पर हम को पी नहीं पाओगे….. हम प्यासे दरिया..मरुस्थलों से बह के आये हैं… विक्रमजीत सिंह जी बहुत ही सुंदर रचना के लिए बधाई हो ….

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 29, 2012

    प्रवीन जी….सादर…. आपका हार्दिक धन्यवाद……

aman kumar के द्वारा
August 28, 2012

भहुत अच्छा भाई !

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 28, 2012

    धन्यवाद अमन जी….

Chandan rai के द्वारा
August 28, 2012

शायर विक्रम जनाब ! बहुत अभिमान था रातों को उनकी स्याही पर…. हम बांके….संधूरी लाल किरणें ले के आये हैं….. …………………………………………………………………………. करो कोशिश….., पर हम को पी नहीं पाओगे….. हम प्यासे दरिया..मरुस्थलों से बह के आये हैं… आपके लेख ने तो झुरझुरी फूंक दी बदन में ! बेहतर ,बेहतरीन ,लाजबाब ,शब्दों से परे !

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 28, 2012

    प्रिय चन्दन जी……सादर….. आपका हार्दिक स्वागत और धन्यवाद भी….

Punita Jain के द्वारा
August 27, 2012

आदरणीय विक्रम जीत जी, ऐ हंकारी समुन्द्र तू जहाँ था अब भी वहीँ है….. हम कतरे सही पर आसमां पे रह के आये हैं… —— बहुत सुन्दर पंक्तियाँ | ——-भावपूर्ण कविता

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आपका स्वागत है…आदरणीया पुनीता जी….. प्रथम प्रतिक्रिया के लिए आप का हार्दिक आभार…..

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
August 27, 2012

करो कोशिश….., पर हम को पी नहीं पाओगे….. हम प्यासे दरिया..मरुस्थलों से बह के आये हैं…. बहुत खूब स्नेही नाती श्री जी, शुभाशीष.

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आदरणीय नाना श्री…….सादर प्रणाम….. अच्छा हुआ आप ने खुद ही दर्शन दे दिए…..नहीं तो आज आप को मेल करने वाले थे……दो-तीन दिन से आप को मंच पर ना देख कर चिंता हो रही थी……. आप के आशीर्वाद की हमेशा ही लालसा बनी रहती है……भगवान से सदा यही दुआ मांगते हैं….कि जब तक ये मंच रहे…..आप हमेशा ही ऐसे आशीर्वाद की बूंदों से भिगोते रहें…… सादर…. नाना श्री जी……

yogi sarswat के द्वारा
August 27, 2012

बहुत अभिमान था रातों को उनकी स्याही पर…. हम बांके….संधूरी लाल किरणें ले के आये हैं….. …………………………………………………………………………. करो कोशिश….., पर हम को पी नहीं पाओगे….. हम प्यासे दरिया..मरुस्थलों से बह के आये हैं… क्या बात है भाई विक्रमजीत सिंह , क्या गज़ब का लिखा है ! बहुत अच्छा लिखा है ! बहुत भाव भरी कविता,हर शेर बड़ी बात कहता हुआ.बधाई. क्या तारीफ करू ? फिर से बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    मित्र योगी जी…… प्रशंसा करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद…..

rajpalsingh के द्वारा
August 27, 2012

पिक्चर बहुत वधिया लाई है….

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    राजपाल जी….. तुहाडा बहुत-बहुत शुक्रिया……

jalaluddinkhan के द्वारा
August 26, 2012

बहुत भाव भरी कविता,हर शेर बड़ी बात कहता हुआ.बधाई.

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आपका बहुत-बहुत शुक्रिया….. आदरणीय जलालुद्दीन जी……सादर….

akraktale के द्वारा
August 26, 2012

चलेंगे दहकते अंगारों पे, ये कह के आये हैं……. उठा के खुद सलीबें बाजुओं पर ले के आये हैं…. बहुत बढ़िया शायरी विक्रमजीत जी. वाह! मजा आगया. बधाई.

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आदरणीय अशोक जी….. आपको मज़ा तो आया…..और हमारा प्रयास सार्थक हुआ…. धन्यवाद…..

rekhafbd के द्वारा
August 25, 2012

विक्रम जीत जी बहुत अभिमान था रातों को उनकी स्याही पर…. हम बांके….संधूरी लाल किरणें ले के आये हैं,जोश से भरी हुई रचना पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें ,आभार

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आदरणीया रेखा जी…..सादर…. आपका बहुत बहुत शक्रिया…..

ajay kumar pandey के द्वारा
August 25, 2012

aadarniya vikramjeet singh जी नमस्कार आपकी kavita bahut badhiya लगी सचमुच aapne ismein kranti ke bhaav jagaye hain bahut badhiya rachna aur krantikaari abhivyakti dhanyawaad ajay pandey

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    अजय पांडे जी…..नमस्कार….. प्रतिक्रिया देने के लिए आभारी हैं आपके……

D33P के द्वारा
August 25, 2012

हम उस उफनते दरिया को ये कह के आये हैं…

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 25, 2012

    आदरणीया दीप्ति जी….. अब सटीक अवलोकन किया है आपने……जी हाँ….. हम ”उस उफनते दरिया” को ये कह के आये हैं… सादर……

jlsingh के द्वारा
August 25, 2012

विक्रम जी बहुत सुन्दर … और क्या कहें करो कोशिश….., पर हम को पी नहीं पाओगे….. हम प्यासे दरिया..मरुस्थलों से बह के आये हैं…. उड़ेंगे रेत के बादल कि छुप जाओगे तुम सब अभी देखा नहीं जलवा, जो हमसब ले के आये हैं

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आदरनिये जवाहर जी……सादर…. हमारी रचना में उफनते हुए भावों को और भड़काने के लिए आभारी हैं आपके…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आदरणीय जवाहर जी……सादर…. हमारी रचना में उफनते हुए भावों को और भड़काने के लिए आभारी हैं आपके…..

dineshaastik के द्वारा
August 25, 2012

हे अहंकारी समुद्र तूं जहाँ था अब भी वहीं है, हम कतरा सही पर आसमाँ पर रहके आये हैं। करो कोशिश…,पर हमको पी नहीं पाओगे, हम प्यासे दरिया , मरुस्थलों में बहके आये हैं। आदरणीय विक्रम जी, बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ……

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आदरणीय दिनेश जी…सादर….. आप का बहुत-बहुत धन्यवाद….

D33P के द्वारा
August 24, 2012

ये कहाँ अंगारो पर चलकर आये है इन्होने तो पूरे देश को ही अंगारो पर चलने के लिए मजबूर कर दिया है

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आपका कहना सत्य है…..आदरणीया दीप्ति जी….

satish3840 के द्वारा
August 24, 2012

विकम जी बहुत खूब !

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आदरणीय सतीश जी…..सादर… आपका हार्दिक धन्यवाद……..

nishamittal के द्वारा
August 24, 2012

वाह विक्रम जी बहुत सुन्दर जोशीली रचना पर बधाई आपको.

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आपका हार्दिक धन्यवाद…… सादर……मातेश्वरी…..

    Melloney के द्वारा
    October 17, 2016

    Wenn schon dann meine liebe Freundin, was bist du denn fürn komischer Vogel, von wegen dein Ton läßt sehr zu wünschen übrig, wer bist du eigentlich ?. Am besten du löscht deinen ganzen Blödsinn von HP, bringt eh nichts nur sinnloses Gelaber, von wegen seanetiosnlles Urteil in Frankfurt, laß es einfach sein…

manoranjanthakur के द्वारा
August 24, 2012

क्रांति को अभिपेरित करती सुंदर भाव की कविता अति सुंदर

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आदरणीय ठाकुर साहब…..सादर… आप का हार्दिक धन्यवाद…..

    Peggy के द्वारा
    October 17, 2016

    Loved that honest recount Penny!! Don’t count on the attire to change tho lol. I would be so diptspoinaed if we had a concert (in 2014, in Toronto, as the first tour stop ~ a gurl can dream) and there was no scarf. Thanks Deb and Penny!

Santosh Kumar के द्वारा
August 24, 2012

विक्रम भाई ,..सादर नमस्ते बहुत खूब ,..तूफानी अभिव्यक्ति ,..बहुत बहुत बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    आदरणीय संतोष जी…..नमस्कार….. आपकी रचनाओं से ही प्रेरणा मिली है….संतोष जी….नहीं तो हम किस काबिल हैं….. बहुत बहुत शुक्रिया….


topic of the week



latest from jagran