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जो तुमको हो पसंद....वही बात कहेंगे........

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गुदड़ी के लाल......

Posted On: 21 Aug, 2012 Others में

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manmohan[1]
वैसे तो केंद्र में सरकार युपीऐ की है, पर बहुत से लोग उसे कांग्रेस की ही मानते हैं, कांग्रेस के इलावा, बाकि सब तो वहां समर्थन देने के लिए हैं, उसमें भी, इसकी समर्थक पार्टियों का समर्थन भी कमाल का है, जहाँ एक और वे कांग्रेस की सरकार का समर्थन तो करते हैं, लेकिन दूसरी और कांग्रेस की नीतियों का विरोध करना उनकी फितरत है, इसे कूटनीति तो बोला जा सकता है, क्या मर्दानगी भी कहा जा सकता है……. कभी जया बच्चन ने भी यही कहा था, कि केंद्र सरकार में मर्दों की कमी है, वैसे इस देश में और भी बहुत से लोगों का यही विचार है कि राजनीति में मर्दों की कमी है. जया जी के इस वक्तव्य से स्त्री विमर्श करने वाले भी खुश हो सकते हैं, उन्हें सेमिनार के लिए एक और विषय जो मिल गया, राजनीति में से कभी-कभी कितने काम की चीज़ निकल आती है….है कि नहीं….. हमारे एक कांग्रेसी मित्र जया जी के इस कथन से सहमत नहीं हैं, वो मानते हैं कि ये बात कहते समय जया ने चश्मा नहीं लगा रखा होगा, क्योंकि फिल्म वालों को चश्मे से ज्यादा गोगल पसंद होता है, वे तो घर के अन्दर, और रात को भी गोगल लगाये रहते हैं, अब कांग्रेसी मित्र का तर्क है कि अगर उन्होंने चश्मा लगाया होता तो उन्हें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की, पगड़ी, दाड़ी और मूंछ दिख गयी होती…… rahulखैर, इस पगड़ी, दाड़ी और मूंछ के इलावा एक पहचान और होती है मर्दानेपन की, और वो है आवाज़..! आवाज़ के आधार पर इस बयान को आँका जाये तो, जया जी ने बिल्कुल गलत नहीं कहा, क्योंकि देश की सबसे मर्दाना आवाज़ केंद्र सरकार में नहीं, जया बच्चन के घर में है, ‘अमिताभ बच्चन’ अगर आपको, मनमोहन सिंह और अमिताभ बच्चन की आवाजें आँख बंद कर के सुनाई जायें, तो आप किसे मर्दाना कहेंगे? एक समय अमिताभ बच्चन भी कांग्रेस में हुआ करते थे, फिर उन्होंने पार्टी छोड़ दी…क्या केंद्र में मर्दों की कमी तभी से शुरू हुई थी, अमिताभ ने कांग्रेस क्यों छोड़ी? इसका साफ़-साफ़ कारण किसी को नहीं पता….या शायद किसी बड़े ज्योत्षी ने बोल दिया हो, ‘कांग्रेस को छोड़ दो, उसका मंगल तुम्हारे लिए भारी है’ लेकिन एक बात तो माननी पड़ेगी…..की फिल्म लाइन में अमिताभ जैसा मर्द आज तक नहीं आया, कुछ लोग फिल्म में दिखाई मर्दानगी को नाटक कह कर खारिज कर देंगे, तो क्या ऐसा नाटक, राजनीति में नहीं होता, क्या देश में पनप रही अराजकता और आतंकवाद इस नाटक के प्रमाण के तौर पर मौजूद नहीं हैं? जया जी का ये कहना कि केंद्र सरकार में मर्दों की कमी है, यह बोल कर उन्होंने देश पर बहुत बड़ा उपकार किया है, शायद अब जनता को पता चल जाये कि ‘राजनीति में मर्द’ किसको कहते हैं……….??????



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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rock के द्वारा
October 17, 2016

That’s the best answer by far! Thanks for coutirbnting.

alkargupta1 के द्वारा
August 29, 2012

उत्तम व्यंग्यप्रधान आलेख के लिए बधाई विक्रमजीत जी

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 29, 2012

    आप का हार्दिक धन्यवाद….. सादर…. अलका जी….

aman kumar के द्वारा
August 28, 2012

रानी लक्ष्मी बाई के बारे में यही कहा था जनरल हुरोज ने की पूरी झाशी में एक ही मर्द था वो थी लक्ष्मी बाई ! भारत के राजनीती में मर्द है तो बस एक सोनिया जी ,इतनी सारी औरते तो है ही सर्कार को चलने के लिए ……….और हा मर्द अब इटली में ही पैदा होते है भारत में तो एक ही है जी ……….

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 28, 2012

    अमन जी…..आपका हार्दिक स्वागत है……. आपका कहना सही है…….तो संसद में लड़ाई-झगडा छोड़ कर इन सभी ‘मर्दों’ को सिलाईयां बुननी चाहियें…..हा……हा…..हा…. प्रथम प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद……..

rekhafbd के द्वारा
August 25, 2012

आदरणीय विक्रमजीत जी ,मनमोहन सिंह और अमिताभ बच्चन की आवाजें आँख बंद कर के सुनाई जायें, तो आप किसे मर्दाना कहेंगे? , जया जी का ये कहना कि केंद्र सरकार में मर्दों की कमी है, यह बोल कर उन्होंने देश पर बहुत बड़ा उपकार किया है, शायद अब जनता को पता चल जाये कि ‘राजनीति में मर्द’ किसको कहते है |बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ में सटीक व्यंग ,आभार

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 25, 2012

    आदरणीया रेखा जी…..सादर…. तारीफ़ के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद……

DHARAMSINGH के द्वारा
August 25, 2012

कहै लखमीचंद छत्रापण* जा-गा, नीच का राज रहैगा – हीजड़े मिनिस्टर बण्या करैंगे, बीर कै ताज रहैगा । दखलंदाजी और रिश्वतखोरी सब बे-अंदाज रहैगा – भाई नै तै भाई मारैगा, ना न्याय-इलाज रहैगा । बीर उघाड़ै सिर हांडैंगी, जिन-पै दल खप-गे थे अठाराह*

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 25, 2012

    आदरणीय धरम सिंह जी…..सादर…. आपका हार्दिक धन्यवाद……

akraktale के द्वारा
August 23, 2012

विक्रमजीत जी                    सादर नमस्कार, कांग्रेस में मर्द नहीं बिल्लीयाँ हैं वह भी खिसियानी.

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय अशोक जी…सादर….. आपने सत्य कहा…..और इन बिल्लियों को इनकी करतूतों का नतीजा भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए…… हार्दिक धन्यवाद….

D33P के द्वारा
August 23, 2012

विक्रम जीत जी नमस्कार जया जी का ये वक्तव्य हमने भी सुना और देखा था सच में बहुत मजा आया था ,आखिर उनके घर में मर्द है तो उसके अंदाज़ का कुछ असर तो उन पर भी आएगा ही ना! और बात रही सत्ता की ,तो इंदिरा जी का मुकाबला तो उसके बाद किसी पुरुष(मर्द नहीं )प्रधानमंत्री ने नहीं किया! उत्तम लेखन के लिए बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीया दीप्ति जी…..सादर…. इंदिरा जी और राजीव जी के बाद……इस पार्टी में कोई पुरुष बचा ही कहाँ है….??? हार्दिक धन्यवाद….

vinitashukla के द्वारा
August 23, 2012

सटीक धारदार व्यंग्य. प्रभावी लेखन पर बधाई.

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    प्रथम आगमन पर आपका स्वागत है…..विनीता जी….. और हार्दिक धन्यवाद भी…..

yogi sarswat के द्वारा
August 23, 2012

विक्रम जीत सिंह जी , क्या खूब लिखा है भाई ! सटीक ! घायल फिल्म का एक डायलोग याद आ गया ” मर्द तो यहाँ कोई बचा ही नहीं ” |

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    प्रिय योगी जी…….नमस्कार…. आप चिंता मत कीजिये……… इस पार्टी में 13वें महीने की 32 तारिख को एक ऐसा मर्द पैदा होगा जो आने वाले समय में कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगा देगा….. हार्दिक धन्यवाद….

Chandan rai के द्वारा
August 23, 2012

विक्रमजीत जी , जब पूरी सत्ता सिहासन का ध्रुवीकरण एक महिला के हाथों में हो तो आपका लेख एकदम तर्कसंगत है !

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    प्रिय चन्दन जी….नमस्कार…. आपका हार्दिक धन्यवाद….

    Sticky के द्वारा
    October 17, 2016

    And to answer your other question, I have a cat, but I’m lucky I can get her into her carrier to go to the vet half the time much less dress her up for holidays, lol! So I do#;7821n&t even attempt it.

phoolsingh के द्वारा
August 22, 2012

प्रिय बिक्रम जी, सादर अभिवादन! आपकी सोच को सलाम……….. फूल सिंह

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय फूल सिंह जी…..सादर….. और आपका हार्दिक धन्यवाद….

jlsingh के द्वारा
August 22, 2012

प्रिय बिक्रम जी, सादर अभिवादन! इंदिरा गांधी के समय में किसी ने कहा था – इंडिया यानी भारत में एक ही मर्द है वह है इंदिरा गांधी आज भी अगर देख जाय तो देश चला कौन रहा है? बसन्ती या वीरू?… और तो आप सब कुछ कह ही चुके हैं ! हम भी यही कहेंगे -,…हमारे गुदड़ी के लाल को सलाम ,.. वाहे गुरु जी का खालसा -वाहे गुरु जी की फ़तेह

    dineshaastik के द्वारा
    August 23, 2012

    भाई जवाहर जी, इन्दिरा इज इन्डिया, इन्डिया इज इन्डिया कहने वाले असम के सत्तकालीन मुख्य मंत्री बरुआ जी थे। संभवतः इन्हहीं चाटुकारों ने उन्हे तानाशाह बना दिया था। परम प्रिय भाई विक्रम जी, सादर नमस्कार। मर्द की बात तो दूर मूझे तो यह भी ज्ञात नही हो पाता कि वास्तविक प्रधानमंत्री कौन है। लगता है कि सभी केबिनेट मंत्रियों को यह अधिकार है। कभी कभी तो  दिग्गी जी में प्रधानमंत्री के दर्शन होने लगते हैं। जानिया मैडम के जो भी निकट होता होता है वही  प्रधानमंत्री बन जाता है। सुपर प्रधानमंत्री तो वही हैं। बहुत ही रोचक व्यंग….बधाई…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय जवाहर जी…..सादर…. आप तो अन्तर्यामी हैं प्रभु…..सब कुछ जानते हैं…… ”वाहेगुरु जी का खालसा -वाहेगुरु जी की फ़तेह”

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय दिनेश जी….सादर……. आपका कहना सत्य है……अन्धों में काना ‘राजा’ ही होता है……. सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद….

seemakanwal के द्वारा
August 21, 2012

आदरणीय विक्रम जी मज़ेदार व्यंग्य है .हार्दिक आभार .

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीया सीमा जी…..सादर….. आपका हार्दिक धन्यवाद

Rajkamal Sharma के द्वारा
August 21, 2012

आजकल मर्द वोह है जिसको किसी की भी आलोचना से किसी भी किस्म का कोई भी दर्द नहीं होता है जय हो शुभकामनाये

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय राजकमल जी …..सादर…. सत्य कहा आपने……अब देखिये न….कोयला घोटाला में रोज़ कितनी फजीहत हो रही है…..लेकिन हमारे ‘माननीय’ बिलकुल बे-परवाह और ‘मौन’ हैं…….क्योंकि उन्हें देश की, देशवासियों की, किसी भी चीख-चिल्लाहट से कोई दर्द नहीं होता……फिर उनका नाम भी तो ‘मौनमोहन’ ऐसे ही नहीं है……??? आपका हार्दिक धन्यवाद

Santosh Kumar के द्वारा
August 21, 2012

विक्रम जी ,.सादर नमस्ते शानदार व्यंग्य !..गुलामी की भी कौनो हद होती है ,…हमारे गुदड़ी के लाल को सलाम ,.. वाहे गुरु जी का खालसा -वाहे गुरु जी की फ़तेह वन्दे मातरम !

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय संतोष जी….सादर….. आपका हार्दिक धन्यवाद…… वाहेगुरु जी का खालसा -वाहेगुरु जी की फ़तेह……

nishamittal के द्वारा
August 21, 2012

बहुत सही कहा है,विक्रम जी वैसे भी कांग्रेस को इंदिरा जी ने संभाला और अब सोनिया के हाथ में कमान है

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीया मातेश्वरी….सादर…. आपका हार्दिक धन्यवाद……

Mohinder Kumar के द्वारा
August 21, 2012

विक्रम जी, नमस्कार आवाज जनाना हो या मर्दाना परन्तु जब तक लीडरशिप की क्वाल्टी नहीं होगी राज्य सुचारू रूप से नहीं चलाया जा सकता…. दूसरे शब्दों में …लीडर ऐसा हो जिसकी नीचे सब पर धाक हो और जो कडे निर्णय लेने में सक्षम हो… तभी काम चलेगा… अमर्जैंसी में कैसे वही लोग जो कभी समय पर दफ़तर नहीं आते थे.. समय से पंहुचने लगे थे…कैसे सभी दुकानों के बोर्ड एक ही साईज और रंगे में रंग गये थे…कैसे तुर्कमान और जामा मस्जिद के इलाके में साफ़ सफ़ाई की गई थी.. लीडर पैदाईशी (बोर्न) होते हैं… बनाये नहीं जा सकते… सार्थक लेख… लिखते रहिये.

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय मोहिंदर जी…..सादर…. सीधी सी बात है…..”जैसा राजा…..वैसी प्रजा” जिस देश का राजा ही ‘गुलाम’ हो……उसका अपने दरबारियों या प्रजा पर क्या प्रभाव पड़ेगा…..??? सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद……

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
August 21, 2012

प्रिय नाती श्री जी, शुभाशीष ढूँढ़ते रह जाओगे …..है न. बधाई.

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय नाना श्री जी…..सादर….. सत्य वचन……अब तो ढूँढने की नौबत ही आ चुकी है…… आपका हार्दिक धन्यवाद…… (अपने स्वास्थ्य का भी ख्याल रखिये…..नाना श्री…….देश अब जाग चुका है…..)

manoranjanthakur के द्वारा
August 21, 2012

यह हुई न मर्दों वाली बात बहुत सुंदर

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आदरणीय ठाकुर साहब……सादर….. सब आप का प्रताप है….. अब देखिये न……जब ‘लोगइन’ से काम नहीं चलता तो हमारे ‘माननीय’ मैडम को ‘मिस्डकाल’ मार कर ही पूछ लेते हैं…..”कि फलां मसले पर क्या बोलना है…..” आपका हार्दिक धन्यवाद……


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