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ऐ मेरे दोस्त...!!!

Posted On: 22 Jun, 2012 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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sad[1]

ऐ मेरे दोस्त ये चेहरे पे उदासी कैसी?
क्या तेरा दिल भी मेरे दिल की तरह टूट गया?
क्या तुझे भी किसी हमराज की याद आती है?
क्या तबियत तेरी तन्हाई में घबराती है?

ऐसा लगता है कि तुने भी कभी मेरी तरह,
अपने महबूब को जी-जान से चाहा होगा,
उसने लेकिन तेरे खवाबों का भरम तोड़ दिया,
तू बता या न बता, ये सच है लेकिन,
हादसा इश्क में जब ऐसा कभी होता है,
आँखें रोयें या न, पर दिल तो बहुत रोता है.

हो गया ऐसा अगर होने दे मायूस न हो,
अपने सीने पे अब तू जब्त का पत्थर रख ले,
वर्ना अहसास जुदाई का रुलायेगा तुझे,
याद आने के जो काबिल नहीं आएगा तुझे,
रूह बेचैन रहेगी न सकूं पायेगी ,
गैर तो गैर हैं ये खुद पे भी झुंझलाएगी,
इससे बेहतर है तू माजी से किनारा करले,
गम के काँटों की जगह खुशियों से दामन भर ले.

इस ज़माने की रवायत से अनजान हो तुम,
किस लिए, किस के लिए, इतने परेशान हो तुम,
कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए,
दिल तो बस एक खिलौना है ज़माने के लिए,
संगदिल लोगों से फ़रियाद नहीं करते कभी,
भूल जाएँ जो, उन्हें याद नहीं करते कभी,
सब्र कर उसको भी एहसास ये हो सकता है,
जो रुलाता है तुम्हे, खुद भी वो रो सकता है,

ऐ मेरे दोस्त ये चेहरे पे उदासी कैसी?
क्या तेरा दिल भी मेरे दिल की तरह टूट गया?…………………



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84 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kaden के द्वारा
October 17, 2016

I’m grtaufel you made the post. It’s cleared the air for me.

amanatein के द्वारा
August 24, 2012

अपने सीने पे अब तू जब्त का पत्थर रख ले, वर्ना अहसास जुदाई का रुलायेगा तुझे, याद आने के जो काबिल नहीं आएगा तुझे, रूह बेचैन रहेगी न सकूं पायेगी , गैर तो गैर हैं ये खुद पे भी झुंझलाएगी, अति अति सुन्दर

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    एक बार फिर से कह रहे हैं….. आपका बहुत-बहुत शुक्रिया…….अमानत जी…. अब तो आना जाना लगा रहेगा….

amanatein के द्वारा
August 24, 2012

वास्तव में आपकी ग़ज़लों से इश्क हो गया है…इन्सान तो इस काबिल रहे नहीं की इशाक करूँ ऐ मेरे जैसे दीवाने इश्क को चल तेरी ग़ज़ल ही सही.. मेरी अपनी एक अदना सी शाएरी अर्ज़ है.. थाम कर हाथ तेरे सहराओं में निकल जाने का इरादा है, इस थोड़े से प्यार में भी नशा कितना ज्यादा है… अमानत ..शुक्रिया..

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    आपकी नज़र….. ”तुम्हारी दुनिया से चले जाने के बाद….हम तुम्हे… हर एक तारे में नज़र आया करेंगे….. तुम हर पल कोई दुआ मांग लेना….. और हम हर बार टूट जाया करेंगे…..” …….आप का बहुत बहुत शुक्रिया……अमानत जी…..

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
August 9, 2012

हादसा इश्क में जब ऐसा कभी होता है, आँखें रोयें या न, पर दिल तो बहुत रोता है. कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए, दिल तो बस एक खिलौना है ज़माने के लिए, बहुत सुन्दर ….गजल …प्यारी रचना गुनगुनाने को जी चाहता है … भ्रमर ५

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 10, 2012

    आदरणीय शुक्ल जी….सादर…. प्रशंसा करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

D33P के द्वारा
July 2, 2012

दिल टूटने की आवाज़ नहीं होती ,अगर टूट ही जाये तो खुदा के पास भी फरियाद नहीं होती …… किस लिए, किस के लिए, इतने परेशान हो तुम……बहुत खूबसूरत

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 8, 2012

    आदरणीया दीप्ति जी…..सादर नमस्कार… अकेला दिल ही क्यों…..सर और टांग टूटने की भी आवाज़ नहीं होती……(अभी पता चला है..) आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…

jyotsnasingh के द्वारा
June 29, 2012

प्रिय विक्रमजीत जी, क्या खूब ग़ज़ल कही है, प्रेम वार्बर्तनी की लिखी ग़ज़ल याद आगई ,खेलने की ही तम्मन्ना थी तो मुझसे कहती ,तुमको बाज़ार से ला देता खिलौना कोई,तुमने समझा न मुहब्बत के इशारों का मिज़ाज ,तुमने देखी न धडकते हुए जज्बों की सरिश्त,मेरे वजदान ने तखलीक किया था जिसको तुमने शोलों में जलाया है वो ख्वाबों का बहिश्त , दाद तो देनी ही पड़ेगी वाह वाह क्या खूब.

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 8, 2012

    आदरणीया ज्योत्स्ना जी…. सादर नमस्कार……. देरी से जवाब देने के लिए शर्मिंदा हैं…एक दुर्घटना की वजह से हम मंच से अनुपस्थित रहे… उम्मीद है आप अन्यथा नहीं लेंगी…. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…..

narayani के द्वारा
June 26, 2012

नमस्कार विक्रम जी बहुत सुंदर रचना. किस लिए किसके लिए इतने परेशान हो तुम…. बहुत सुंदर पंक्तिया . धन्यवाद नारायणी

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 26, 2012

    नमस्कार नारायणी जी…. ब्लॉग पर आपका स्वागत है…… और….धन्यवाद भी…..

Mohinder Kumar के द्वारा
June 25, 2012

विक्रम जी, कहीं पे निगाहें कहीं पर निशाना वाली कहावत पर चल कर आपने कहीं अपने मन की बात तो नहीं कह डाली इस रचना के माध्यम से ? वैसे भी इस जिन्दगी ” इक मुहब्बत का ही गम तन्हा नहीं.. हम क्या करें”… यानि ” और भी गम हैं जमाने में इक मुहब्बत के सिवा”…. लिखते रहिये.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 25, 2012

    मोहिंदर जी…..सादर…. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…..

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 25, 2012

ऐ मेरे दोस्त….लगता है आप इश्क में घायल हैं वरना ऐसे जज़्बात हर किसी से नहीं निकलते…. बहुत सुन्दर रचना

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 25, 2012

    प्रिय समीर जी….. रचना की सराहना के लिए आप का ह्रदय की गहराइयों से धन्यवाद….

satish3840 के द्वारा
June 25, 2012

नमस्कार विकम जी क्या खूब लिखा हे आपने ! बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 25, 2012

    आदरणीय सतीश जी…..सादर नमस्कार…. आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए अनमोल है…… धन्यवाद….

yogi sarswat के द्वारा
June 25, 2012

सब्र कर उसको भी एहसास ये हो सकता है, जो रुलाता है तुम्हे, खुद भी वो रो सकता है, ऐ मेरे दोस्त ये चेहरे पे उदासी कैसी? क्या तेरा दिल भी मेरे दिल की तरह टूट गया?…… मित्रवर श्री विक्रम जीत सिंह जी ! बहुत सुंदर रचना ! आजकल प्यार तो बस तिजारत बन कर रह गया है, सच्चा दोस्त पाना बहुत मुश्किल हो जाता है ! बहुत सुन्दर भाव

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 25, 2012

    प्रिय मित्र योगी जी….. सच कहा आपने….सच्चा प्यार पाना बहुत मुश्किल हो चला है आजकल….. आपका हार्दिक धन्यवाद…..

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
June 25, 2012

विक्रम भाई, नमस्कार वो भूली दास्ताँ लो फिर याद आ गयी…..जब-जब किसी का दिल टूटेगा तो अपनी दास्ताँ याद करते रहोगे…आखिर कब तक….. भूल जाओ मेरे भाई…. वैसे टूटे हुए दिल की आवाज़ दिल में समां गयी…सुन्दर अभिव्यक्ति… आभार…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 25, 2012

    अजय जी…सादर….. अजी आप क्या आये……बहार आ गयी…../// अब तक कहाँ गुम थे प्रभु…….??? अति सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए आप का ह्रदय से आभार……..

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    June 25, 2012

    मेरे आने से बहार आ गयी…..आश्चर्य…..भटकते मुसाफिर हैं …..स्थिर रहना हमारी फितरत नहीं तो क्या बताएं कहाँ गुम थे… कहीं गुम नहीं थे. जीवन की आपा-धापी में फंस गए थे. उससे अब जा के थोडा बहुत निकले हैं. मुलाकातें होती रहेंगी. क्षमा चाहता हूँ आपकी पिछली रचनाओं पर चाहते हुए भी प्रतिक्रिया नहीं दे पाया.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 25, 2012

    प्रिय भाई अजय जी…. आपने सुना होगा ‘हम-प्याला’ या ‘हम-निवाला’…लेकिन यहाँ तो ये सब मुमकिन नहीं है….यहाँ तो ‘हम-ख्याल’ ही हो सकते हैं……और जब कोई ‘हम-ख्याल’ बहुत दिनों बाद मिलता है तो ‘बहार’ का आना तो बनता है ना….. रही जीवन की आपा-धापी की बात तो……इतना भी क्या मसरूफ होना की देखने वाले तरस जायें…..इसी बात पर अर्ज़ है….. ”क्या मुमकिन है…..किसी का इस तरह मजबूर हो जाना…… ज़मीं का सख्त होना……..और….आसमां का दूर हो जाना…..”

R K KHURANA के द्वारा
June 24, 2012

प्रिय विक्रम जी, बहुत सुंदर रचना ! आजकल प्यार तो बस तिजारत बन कर रह गया है ! प्यार के नाम पर धोखा ही मिलता है ! सच्चे आशिक कहाँ है आज ! सुंदर रचना के लिए बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    आदरणीय खुराना जी….सादर… सच कहा आपने….. आपके प्रथम आगमन और रचना की तारीफ़ के लिए शुक्रिया….. आपका समर्थन अमूल्य है…….ऐसे ही सहयोग बनाये रखें…

June 24, 2012

संगदिल लोगों से फ़रियाद नहीं करते कभी, भूल जाएँ जो, उन्हें याद नहीं करते कभी, वाह विक्रम भैया, ये पंक्तियाँ मुझे खास अच्छी लगीं| बहुत अच्छी कविता…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    कुमार गौरव जी….सादर… आपका हार्दिक अभिनन्दन और धन्यवाद भी…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    कुमार गौरव जी….सादर… आपका हार्दिक अभिनन्दन और धन्यवाद भी…

rahul panday के द्वारा
June 24, 2012

विक्रम जी नमस्कार ‘कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए, दिल तो बस एक खिलौना है ज़माने के लिए,’ लाज़वाब पंक्तियाँ दिल से निकल कर सीधे दिल में समा जाती हैं | बधाई!

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    नमस्कार राहुल जी…… आपका हार्दिक धन्यवाद….

roshni के द्वारा
June 24, 2012

विक्रमजीत जी नमस्कार बेहतरीन रचना .. हर पंकित सुंदर भूल जाएँ जो, उन्हें याद नहीं करते कभी, सब्र कर उसको भी एहसास ये हो सकता है, जो रुलाता है तुम्हे, खुद भी वो रो सकता है, ऐ मेरे दोस्त ये चेहरे पे उदासी कैसी? क्या तेरा दिल भी मेरे दिल की तरह टूट गया? आभार

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    नमस्कार रोशनी जी…… आपका हार्दिक धन्यवाद….

minujha के द्वारा
June 24, 2012

बहुत भावपूर्ण  व दर्द  से भरी रचना अच्छा लिखा है आपने विक्रम  जी

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    आदरणीय मीनू जी…..आपका हार्दिक धन्यवाद….

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    आदरणीय मीनू जी…..आपका हार्दिक धन्यवाद………

chaatak के द्वारा
June 24, 2012

‘कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए, दिल तो बस एक खिलौना है ज़माने के लिए,’ लाज़वाब पंक्तियाँ दिल से निकल कर सीधे दिल में समा जाती हैं | बधाई!

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    आदरणीय चातक जी….. प्रथम आगमन पर आपका स्वागत……और आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

rajpal singh के द्वारा
June 24, 2012

vikram veer ji bahut vadhiya peshkash

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    राजपाल सिंह जी….. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

akraktale के द्वारा
June 23, 2012

विक्रमजीत जी नमस्कार, कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए, दिल तो बस एक खिलौना है ज़माने के लिए, संगदिल लोगों से फ़रियाद नहीं करते कभी, भूल जाएँ जो, उन्हें याद नहीं करते कभी, वाह! क्या बात है बहुत सुन्दर रचना. बधाई.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    आदरणीय अशोक जी…..नमस्कार…. आपकी उत्साह बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया के लिए……. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
June 23, 2012

विक्रम जी, नमस्कार- गैर तो गैर हैं ये खुद पे भी झुंझलाएगी, इससे बेहतर है तू माजी से किनारा करले, उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई ले…………………..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    अंकुर जी…..नमस्कार…. आपके सहयोग के लिए…..आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

vivek bhandari के द्वारा
June 23, 2012

विक्रम जी नमस्कार बहुत सुन्दर लिखा है आपने

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 24, 2012

    विवेक जी…..नमस्कार… आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

allrounder के द्वारा
June 23, 2012

नमस्कार भाई विक्रमजीत सिंह जी… आप मुझे प्रश्न करने से रोकते हो अपने तो अपने दोस्त से एक साथ इतने सवाल कर डाले ! खैर अच्छे प्रश्नों की अभिव्यक्ति पर अभिनन्दन !

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    नमस्कार सचिन भाई…. आपका आना सुखद रहा…..बहुत-बहुत शुक्रिया…..

yamunapathak के द्वारा
June 23, 2012

जीवन की कश्ती सारे तूफ़ान nahin झेल पाती फिर भी कोशिश जारी रखती है.भाव बहुत सुन्दर हैं.विक्रमजी

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय यमुना जी…सादर… आपका बहुत-बहुत शुक्रिया…..

    Amory के द्वारा
    October 17, 2016

    Quote:he had the more important thing that defines superheroes: he went around in public in his underwear…..man in underwear magical powers…..crime fighting man in unne.pants.r..undergarment….underpadts..Like, what are you, six?j/k!I’m with Vincent, probably came from strongman acts and very likely wresting.But the cape is a weird touch, don’t ya think?

alkargupta1 के द्वारा
June 23, 2012

विक्रम जी , बहुत सुन्दर शब्दों में भावों को अभिव्यक्ति दी है…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय अलका जी…सादर… आपका बहुत-बहुत शुक्रिया…..

dineshaastik के द्वारा
June 23, 2012

ऐ दोस्त मेरी तरह बेवफाई सहने वाले, उसे भूल  जाओ   मुझसे कहने वाले, कहना तो आसान, पर भुलाना नहीं होता, सच्ची मुहब्बत करने वालों का जमाना नहीं होता, मुहब्बत में बेवफा की याद की जो सजा पाता है, ये वो नशा है जिसमें बहुत मजा आता है, सच्ची मुहब्बत  निभाने के लिये नहीं होती, दिवानों के लिये है जमाने के लिये नहीं होती, भुलाने की कोशिश  भी याद करने का बहाना है, ऐसे तो बहुत ही मुश्किल  उसे भूल  पाना है, वो तो रुलायगा ही जिसका काम  रुलाना है, वो क्यों रुलायगा उसे जो जिसका दिवाना है, दोस्त इसलिये उदास  हूँ कि उसने चोट दी, दिल  तोड़ा नहीं हैं, हकीकत  मैं छोड़  दिया यादों में छोड़ा नहीं है। विक्रम  जी आपकी सुन्दर रचना के लिये समर्पित  उपरोक्त पंक्तियाँ…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय दिनेश जी….सादर… हमारी रचना को सम्पूर्णता प्रदान करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद…. इसीलिए तो आप वन्दनीय हैं…. सादर…

jlsingh के द्वारा
June 23, 2012

विक्रम भाई, क्या बात है …लगी है कभी लगता है दिल पर …बहुत सुन्दर जज्बात …ऐसा भी होता है … बधाई हो रचते रहिये …ऐ दिले नादाँ हादसा इश्क में जब ऐसा कभी होता है, आँखें रोयें या न, पर दिल तो बहुत रोता है. कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए, दिल तो बस एक खिलौना है ज़माने के लिए, संगदिल लोगों से फ़रियाद नहीं करते कभी, भूल जाएँ जो, उन्हें याद नहीं करते कभी वाह!… वाह!..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय जवाहर जी…सादर… आप ने सही अंदाज़ा लगाया…..प्रभु… ”आँखें रोये या ना…दिल तो बहुत रोता है..” सादर…

surendr shukl Bhramar5 के द्वारा
June 22, 2012

हादसा इश्क में जब ऐसा कभी होता है, आँखें रोयें या न, पर दिल तो बहुत रोता है. कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए, दिल तो बस एक खिलौना है ज़माने के लिए, संगदिल लोगों से फ़रियाद नहीं करते कभी, भूल जाएँ जो, उन्हें याद नहीं करते कभी, विक्रम भाई क्या बात है …लगी है कभी लगता है दिल पर …बहुत सुन्दर जज्बात …ऐसा भी होता है … बधाई हो रचते रहिये …ऐ दिले नादाँ … भ्रमर ५

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय शुक्ल जी….सादर… ऐसे ही स्नेहाशीष बनाये रखें……

Punita Jain के द्वारा
June 22, 2012

संगदिल लोगों से फ़रियाद नहीं करते कभी, भूल जाएँ जो, उन्हें याद नहीं करते कभी, सब्र कर उसको भी एहसास ये हो सकता है, जो रुलाता है तुम्हे, खुद भी वो रो सकता है,                                                  —–  बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय पुनीता जी…..सादर… प्रथम आगमन पर आपका हार्दिक स्वागत….और धन्यवाद भी…..

    Jory के द्वारा
    October 17, 2016

    Blogging is a slow process, but just like a bike..once you get the hang of it then the rest is easy..its all about being consistence..“Black Seo Guy “Signing OfaifTrâff€cColeman´s last [type] ..Twitter:@goldenkoi

June 22, 2012

भैया, अब आप से क्या छुपाना सब-कुछ तो आप जानते ही हैं……………………का करू सजनी …….आये न बालम……….!

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रिय भैया अनिल जी… ”ये न थी हमारी किस्मत के विसाल-ऐ-यार होता” अब तो खुश……(हा…हा….हा..)

rekhafbd के द्वारा
June 22, 2012

विक्रम जी , भूल जाएँ जो, उन्हें याद नहीं करते कभी, सब्र कर उसको भी एहसास ये हो सकता है, यादें बड़ी हसीं होती है ,ताउम्र यहाँ डूबने का मन होता है अति सुंदर शब्द पिरोये है आपने

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय रेखा बहन जी….. ऐसे ही स्नेहाशीष बनाये रखें…..

seemakanwal के द्वारा
June 22, 2012

इससे बेहतर है तू माज़ीसे किनारा कर ले ,ग़म के काँटों की जगह खुशियों से दामन भर ले .बहुत खूबसूरत नज़्म है .बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय सीमा जी….. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

Santosh Kumar के द्वारा
June 22, 2012

विक्रम जी ,.सादर नमस्कार बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति सब्र कर उसको भी एहसास ये हो सकता है, जो रुलाता है तुम्हे, खुद भी वो रो सकता है,….हार्दिक बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय संतोष जी…सादर नमस्कार…. रचना की सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 22, 2012

क्या तेरा दिल भी मेरे दिल की तरह टूट गया?… दिल का खिलौना हाय टूट गया प्रिय नाती श्री , सस्नेह बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति. बधाई

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    June 22, 2012

    प्रिय नाती श्री , सस्नेह मुझे बहुत प्रसन्नता है की आप मेरे स्वास्थ के बारे में चिंतित हैं . आप के स्नेह के प्रति आभार . आप चिंता नहीं करिए. पि.जी.आई. में इलाज चल रहा है.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    नाना श्री…..सादर अभिवादन….. आपको ‘नाना जी’ कहते हैं….तो इतना तो हक बनता ही है…..बुजुर्गवार.. भले आप से बहुत दूर सही….लेकिन सम्मान तो आप का दिल करते हैं…. आप सदा सलामत रहें…यही दुआ भगवान से हरदम मांगते हैं…. सादर…..

चन्दन राय के द्वारा
June 22, 2012

विक्रम साहब , अब किसी हसीं को अपना दीवाना बना के छोड़ोगे , या फिर किसी को अपना बना के छोड़ोगे, इस ज़माने की रवायत से अनजान हो तुम, किस लिए, किस के लिए, इतने परेशान हो तुम, कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए, दिल तो बस एक खिलौना है ज़माने के लिए,

    चन्दन राय के द्वारा
    June 22, 2012

    अभी मेरे इक मित्र आपकी रचना मेरे साथ बैठे पढ़ रहे थे , और आपकी तस्वीर देख के बोले यार इनका लुक तो दाउद जैसा लग रहा है , तो सोचा आपको बता दूँ

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 23, 2012

    चन्दन जी…. आपका बहुत बहुत धन्यवाद…. और हाँ….आपके मित्र ने जो देखा अच्छा ही देखा होगा…..दाऊद भी तो आखिर इंसान ही है….. धन्यवाद……


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