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ये कैसी दुर्घटना...???

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manmohanCartoon[1]
यह दुर्घटना बहुत बढ़िया शब्द है….दुर्घटना हमेशा किसी की गलती से होती है…..दुर्घटना के शिकार हुए बन्दे को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ता है…राजनीति का शिकार सरकार में भर्ती होना चाहता है….क्या सरकार दुर्घटनाग्रस्त नेताओं का अस्पताल है?……अस्पताल एक ऐसी जगह होती है….जहाँ से हर आदमी जल्दी से जल्दी निकलना चाहता है…..सरकार एक ऐसा अस्पताल है जहाँ से कोई नेता बाहर नहीं निकलना चाहता……तो क्या देश इसलिए ही बीमार रहता है…….???? तो हम बात कर रहे थे दुर्घटना की….दुर्घटना हमेशा किसी न किसी की गलती से होती है….अब यहाँ पर गलती किस की थी….? कोई प्रधानमन्त्री तो ऐसी गलती कर नहीं सकता…तो क्या सारी गलती राजनीति की है….बेचारे मनमोहन सिंह तो अपने रास्ते जा रहे होंगे…..राजनीति ने ही आकर टक्कर मार दी…..ये राजनीति चाहे कितनी भी बुरी क्यों न हो….लेकिन नेताओं को तो यह विश्वसुन्दरी लगती है…..हर नेता उसे अपने सीने पर झेलना चाहता है…..वैसे..अगर कोई विश्वसुन्दरी हमारे या आपके सीने से भी टकरा जाये तो आपको या हमें कहाँ बुरा लगने वाला है….?????
मनमोहन सिंह का कहना है कि उनका राजनीति में आना एक दुर्घटना है…अरे भाई दुर्घटना होने के बाद हाथ-पैर टूटते तो देखे-सुने पर प्रधानमन्त्री बनते पहली बार देखा है…..हाँ कुछ टूटा तो था….और वो थी कईयों की आस….जो यही सोच रहे थे कि ये दुर्घटना हमारे साथ क्यों नहीं हुई..???? अब इसमें गलती किस की है दुर्घटना तो हुई थी ‘रिमोट कंट्रोल’ से…..अब रिमोट कंट्रोल को जो चैनेल अच्छा लगा उसने चला दिया…..जो दुर्घटना अच्छी लगी करवा दी……
मनमोहन सिंह को भी कहाँ पता था कि ये दुर्घटना होने वाली है…..मतलब वो प्रधानमन्त्री बनने वाले हैं…..वैसे ऐसा पहली बार नहीं हुआ….पहले भी कई बार हो चुका है…पहले भी कई बार इस देश में कई दुर्घटनाग्रस्त नेता हो चुके हैं….इंद्र कुमार गुजराल तो याद होंगे आपको…….आजकल क्या कर रहे हैं…????? एक और थे देवेगौडा जाग रहे या सो रहे हैं…….विश्वनाथ प्रताप सिंह को तो जानते हैं आप…..उन्होंने ने तो खुद ही अपने साथ बहुत भारी दुर्घटना कर ली थी….पूरे देश का समाजवाद ही जातिवाद में बिखर गया था….
अब आते हैं मुद्दे की बात पर…सबसे बड़ी दुर्घटना तो कांग्रेस पार्टी के साथ हुई….पूरे 110 साल का वजूद और 65 साल की आज़ादी के बाद भी…यह पार्टी नेहरु खानदान के बाहर एक भी ऐसा नेता पैदा नहीं कर पाई….जो पार्टी के नेताओं को एकजुट रख सके…दुर्घटना पर दुर्घटना करने और कई बार हाथ-पाँव तुडवाने के बाद….बड़े-बूड़े नेता अपनी बहु-बेटी की उम्र की महिला के चरणों में जा गिरे….उसी खानदान की शरण में पहुंचे जो कहलाता तो ‘गाँधी’ है लेकिन है ‘नेहरु’ का…..
अब हिंदुस्तान की राजनीति में जो दुर्घटना हुई वो ये कि अब यहाँ पार्टियाँ नेता नहीं बनातीं…..बल्कि नेता पार्टी बनाते हैं…इसलिए पार्टियाँ ‘लोकतान्त्रिक’ न होकर ‘खानदानी’ बन चुकी हैं…..जो खानदानी नहीं वो नेता नहीं बन सकता…….और जब कोई खानदानी नेता उपलब्ध नहीं होगा…..तो मनमोहन जी जैसों के साथ ‘दुर्घटना’ होती है………..



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69 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Keydren के द्वारा
October 17, 2016

Wow! Great to find a post with such a clear messega!

June 17, 2012

विक्रम भैया नमस्ते विलम्ब के लिए क्षमा चाहता हूँ| थोड़ी व्यस्तताएं हैं| बहुत सटीक व्यंग किया आपने मनमोहन जी जैसों के साथ हुई दुर्घटना पर| बधाई|

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 17, 2012

    गौरव भैया नमस्कार…. क्षमा मांग कर क्यों शर्मिंदा करते हैं…..देर आये-दुरुस्त आये….. आपका तहे-दिल से शुक्रिया….

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
June 16, 2012

विक्रम भाई नमस्कार. क्षमा-प्रार्थी हूँ. कुछ व्यस्तता के चलते समय से प्रतिक्रिया नहीं दे सका. अब कहना भी क्या है ? गुरुजनों ने आशीर्वाद प्रदान कर दिया ही है. सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 16, 2012

    अजय भाई नमस्कार….. अरे क्षमा मांग कर काहे शर्मिंदा करते हैं…… आप जब भी आये यही बहुत है हमारे लिए….. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…..

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 15, 2012

सुन्दर व्यंग्यात्मक आलेख,विक्रम जी.ये तो नेताओं का तकियाकलाम है कि वे दुर्घटनावश राजनीति में आ गए.वरना वे तो हर पल ऎसी दुर्घटनाओं की प्रतीक्षा करते रहते हैं.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 16, 2012

    आदरणीय राजीव जी….नमस्कार…. सही कहा आपने…. समय निकाल कर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक आभार…..

    Kourtney के द्वारा
    October 17, 2016

    June 30, 2012 Thanks , I have just been looking for info about this subject for ages and yours is the greatest I have discovered till now. But, what about the bottom line? Are you sure in regards to the source?|What i don’t understood is in fact how you are no longer actually much more neprry-arefetled than you may be now. You’re very intelligent.

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 12, 2012

विक्रम भाई बहुत सटीक व्यंग्यात्मक लेख है आपका….ये ऐसी दुर्घटना है जो घटित तो मनमोहन जी के साथ हुयी लेकिन चोटिल पूरे भारत की जनता हो गयी…हा हा हा

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 13, 2012

    समीर भाई..सादर नमस्कार….. आपका आना और सहयोग देना…..सराहनीय है…. बहुत-बहुत धन्यवाद…..

minujha के द्वारा
June 12, 2012

विक्रम जी ,आपकी रचना पर मुझे वो विज्ञापन याद आ रहा है -दाग अच्छे है…..अगर ये वाकयात दुर्घटनाएं हैं तो माशा-अल्लाह हर किसी के साथ ऐसी दुर्घटना हो यही दुआ रहेगी,बढिया व्यंग्य.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 13, 2012

    मीनू जी..सादर नमस्कार… आपका प्रतिक्रिया देने का ढंग निराला है……”दाग अच्छे हैं….” आपका बहुत-बहुत धन्यवाद……

Santosh Kumar के द्वारा
June 12, 2012

विक्रम भाई ,.सादर नमस्कार बहुत खूबसूरत व्यंग्य ,..ये दुर्घटनाएं देश पर बहुत भारी पड़ती हैं ,…बहुत बहुत बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 13, 2012

    संतोष भाई..सादर नमस्कार… सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…..

roshni के द्वारा
June 12, 2012

विक्रम जी बेचारे मनमोहन सिंह तो अपने रास्ते जा रहे होंगे…..राजनीति ने ही आकर टक्कर मार दी… सही कह रहे है आप बेचारे मनमोहन जी को टक्कर ही लगी होगी … अब याददाश्त चली गयी और भुगत सारी जनता रही है .. सुंदर व्यंग आभार

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 13, 2012

    रोशनी जी….सादर नमस्कार… आपका स्वागत है…हमारे ब्लॉग पर…..और….. धन्यवाद भी….रचना की सराहना के लिए…. और हाँ….आपका ‘तारों का कारोबार’ कैसा चल रहा है….????

Mohinder Kumar के द्वारा
June 12, 2012

विक्रम जी, भाग्य भाग्य की बात है कि किसी को दुर्घटना वश राज पाठ मिल जाता है और किसी का “राम नाम सत” हो जाता है हाथों की चंद लकीरों का… ये किस्सा है तकदीरों का सटीक व्यंग्य के लिये बधाई.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 12, 2012

    आदरणीय मोहिंदर जी…सादर… रचना की सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…..

rahul panday के द्वारा
June 12, 2012

वाह!!! बहुत अच्छा लिखा है बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 12, 2012

    धन्यवाद राहुल जी….

vivek bhandari के द्वारा
June 12, 2012

सटीक व्यंग

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 12, 2012

    धन्यवाद विवेक जी….

D33P के द्वारा
June 11, 2012

विक्रम जी आपकी वापिसी पर जागरण जंक्शन ये भी आपका स्वागत आपकी पोस्ट फीचर्ड करके किया है ! इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आपका ह्रदय से आभार दीप्ति जी….

yamunapathak के द्वारा
June 11, 2012

सटीक व्यंग विक्रमजी.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय यमुना जी…. आपका बहुत बहुत धन्यवाद….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 11, 2012

प्रिय नाती श्री जी / आदरणीय विक्रम जी . सादर सटीक व्यंग. बधाई

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय नाना जी…..सादर प्रणाम…. अब कैसी तबियत है आपकी……?? ऐसे ही स्नेहाशीष बनाये रखें……. सादर…..

yogi sarswat के द्वारा
June 11, 2012

मित्रवर विक्रमजीत सिंह जी नमस्कार ! ये दुर्घटना देश के लिए खतरनाक हो जाती है और ऐसे “चोरों ” को सहना पड़ता है ! बेहतरीन लेख ! बहुत ही सटीक व्यंग्य !

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    प्रिय मित्र योगी जी…. देश के लिए चाहे खतरनाक हो…..लेकिन ये नेता तो रोज़ ऐसी दुर्घटना की मनौती मांगते हैं……. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद…….

akraktale के द्वारा
June 10, 2012

विक्रमजीत जी सादर नमस्कार,जो खानदानी नहीं वो नेता नहीं बन सकता…….और जब कोई खानदानी नेता उपलब्ध नहीं होगा…..तो मनमोहन जी जैसों के साथ ‘दुर्घटना’ होती है………. बहुत सुन्दर लिखा है आपने.राजनीति कि दुर्घटनाएं ऐसी ही होती हैं.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय अशोक जी….सादर नमस्कार….. रचना की सराहना के लिए आपका तहे-दिल से शुक्रिया……

मनु (tosi) के द्वारा
June 10, 2012

आदरणीय विक्रम जीत जी ! क्या व्यंग्य है !!!क्या चुटीला अंदाज़…… गजब !!! कई बार कमेन्ट लिखे बढ़िया -बढ़िया पर लाइट कमबखत !!! आज का युग दुर्घटनाओ का युग ,,,, सही हालात ब्यान किए आपने … बधाई !!! 

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    स्नेही मनु जी…. आपका स्वागत है…..और हार्दिक आभार भी…….धन्यवाद….

D33P के द्वारा
June 10, 2012

विक्रमजीत जी आपका बहुत बहुत स्वागत है ,आपकी वापसी बहुत प्रेममयी अभिव्यक्ति से साथ हुई और आपकी दूसरी रचना उसके बिलकुल विपरीत भावों की है !मगर बहुत खूबसूरत और आज के राजनितिक हालत पर व्यंग करती !यहाँ सभी दुर्घटना से बचे हुए लोग आते है जिनके दुर्घटना के बाद कुछ पुर्जे सरके हुए और हिले हुए होते है ..अब आप ही बताइए ये क्या देश को संभालेंगे जो खुद दुर्घटना ग्रस्त है .बेचारे मनमोहन सिंह देश की अर्थव्यवस्था के चक्कर में अपनी अर्थव्यस्था भी भूल गए और आ गए मैडम की शरण में ..जो अब उनकी अर्थव्यवस्था को अपने इशारे पर चला रही है ! आपने बिलकुल सही कहा ये सरकार दुर्घटनाग्रस्त लोगो का अस्पताल है !यहाँ से इनके जीवाणु निकल कर पूरे देश की व्यवस्था को संक्रमित कर रहे है जब तक ये पूरा अस्पताल संक्रमण मुक्त नहीं हो पाता हालत नहीं सुधर सकते …….. आपको बधाई आपकी उत्कृष्ट रचना के लिए

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय दीप जी….सादर नमस्कार…… विस्तृत और सटीक प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार…. आपके सहयोग के लिए तहे-दिल से शुक्रगुजार हैं हम….

rekhafbd के द्वारा
June 10, 2012

विक्रम जी ,आशीर्वाद ,ऐसे ही लिखते रहें ,बहुत बढ़िया व्यंग ,वैसे ऐसी दुर्घटनाये देश के को न जाने कहांले जाएँ गी ,सार्थक लेख पर बधाई ,जीते रहो

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    प्रिय बहन रेखा जी…सादर प्रणाम…. आपकी स्नेहाशीष के लिए सदैव नतमस्तक हैं…..

ajay kumar pandey के द्वारा
June 10, 2012

विक्रमजीत सिंह जी नमन समर्थन देने के लिए आभार ऐसे ही लेखन संपर्क बनाये रखियेगा धन्यवाद

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    प्रिय अजय जी…. समर्थन के लिए आपका हार्दिक आभार….

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
June 10, 2012

विक्रम जी बहुत ही सटीक लेख दिया है आपने अच्छा लगा ऐसे ही लिखते रहिएगा,

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय सत्यशील जी…..सादर… अपना आशीर्वाद ऐसे ही बनाये रखें……

rajpal singh के द्वारा
June 10, 2012

vikram veer ji…..sat sri akal…. bahut hi badiya…….sahi kaha aapne…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    सत श्री अकाल….राजपाल जी….. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…..

shashibhushan1959 के द्वारा
June 10, 2012

आदरणीय विक्रम भाई जी, सादर ! ऐसी हसीन दुर्घटनाएं आम जनता के साथ क्यों नहीं होती ! बहुत से लोगों की तो उम्र बीत जाती है इस इन्तेजार में की उनके साथ भी ऐसी कोई दुर्घटना हो और वे मंत्री, अध्यक्ष, आदि बन जाएँ ! सटीक व्यंग्य !

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय बड़े भाई शशि जी…. कहाँ थे आप…. ”बहुत देर से दर पे आँखें लगी थी…” चलिए…..आप आये तो……आपका हार्दिक अभिनन्दन…

jlsingh के द्वारा
June 10, 2012

आदरणीय विक्रम जी, सादर अभिवादन ! आपका हाथ कहाँ है….. चूमने का दिल करता है …… कब से सम्हाल कर रखा था इसी दुर्घटना के लिए ! वाह वाह करने से केवल काम नहीं चलने वाला … दोन हाथ से ताली भी बजानी पड़ेगी …. लेकिन यह दुर्घटना तो मजबूरी में हुई थी बेचारे आज भी कितने मजबूर हैं बेबस है …. और आप जो है बेचारे की मजबूरी को दुर्घटना कह रहे हैं… देश की अर्थब्यवस्था को पटरी पर लाते लाते कही खुद बेपटरी न हो जाएँ .. बेचारे को चिंता लगी हुई है …. आजकल मीटिंग में बोलने भी लगे हैं बादही हो महा प्रभु … इस खूबसूरत ब्यंग्य लेखन पर ….. इन्तजार है आपकी दूसरी दुर्घटना की …..

    jlsingh के द्वारा
    June 10, 2012

    बधाई हो महाप्रभु!

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय जवाहर जी…नमस्कार….. अजी हम कहाँ के महा-प्रभु…….ये तो आपका बड़प्पन है…. हम छोटे हैं…..तो आप बड़े भाई ही बने रहिये…..और अपना आशीर्वाद सदा ऐसे ही बनाये रखिये…… हार्दिक आभार….

dineshaastik के द्वारा
June 10, 2012

विक्रम जी बहुत ही सुन्दर एवं सटीक  व्यंग, बेहतरीन  व्यंग  कल्पना। ऐसा ही कुछ  बयान एक  बार अटल जी ने दिया था। उनकी पीड़ा थी कि वह राजनीति में जो करने आये थे। भष्ट साथियों की वजह से नहीं कर पाये थे। जनता भी उनसे बहुत आशावान थी। जैसी कि मन्नू भाई से। लेकिन मन्नू भाई तो कठपुतली हैं। जीवित कठपुतली के अभिनय का  आनन्द कुछ  और ही है।  वास्तविक  व्यंग  के लिये बहुत बहुत बधाई…..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय दिनेश जी….सादर…. आपने रचना के मर्म को समझा…. हार्दिक आभार…

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 10, 2012

देखन में छोटन लगे घाव करे गंभीर ! अबतक तो मेरी जानकारी में एक ही तरह का अस्पताल था | दूसरे प्रकार के सम्बन्ध में दी गयी जानकारी लाजवाब ! यह लघु आलेख गागर में सागर है ! मान्य भाई विक्क्रम्जीत सिंह जी बहुत-बहुत बधाई !! पुनश्च !!

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय विजय जी…..नमस्कार… सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार……

Seema kanwal के द्वारा
June 9, 2012

सादर नमस्कार बहुत खूब लिखा है .इतनी खूबसूरत दुर्घटना हमारे माननीय तो रोज़ चाहेंगे .

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय सीमा जी…नमस्कार…. आपका हार्दिक स्वागत और प्रथम प्रतिक्रिया के लिए आपका शुक्रिया

satish3840 के द्वारा
June 9, 2012

नमस्कार विक्रम जी बहुत करारा व्यंग्य / मेरी तो शुभ कामना आपके साथ हें / आप भी इस राजनेतिक दुर्घटना के शिकार हो और राजनेतिक विशव सुन्दरी हमारी भाभी बन जाए / बहुत खूब / माफ़ करना विक्रम जी पिछले १५ -२० दिन से जे जे न जाने क्यूँ धीमा चल रहा हें जिस कारन टिप्पणी व् पोस्ट पढ़ना एक बड़ा मुश्किल काम हो चला हें / इसी लिए थोड़ा देरी हुई / क्षमा

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आदरणीय सतीश जी…..नमस्कार… आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….. नेट की समस्या से सभी जूझ रहे हैं…..

allrounder के द्वारा
June 9, 2012

अच्छी पेशकश के लिए बधाई भाई विक्रमजीत जी …….. !

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आप का तहेदिल से शुक्रिया….सचिन भाई….

nishamittal के द्वारा
June 9, 2012

ईश्वर करे ऐसी दुर्घटना किसी के साथ न हो विक्रम जी शायद कुछ हद तक मनमोहन जी सही हैं क्योंकि वो बलि का बकरा हैं,रिमोट तो मैडम के हाथ में है

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    आपने सही कहा……मातेश्वरी…. धन्यवाद…

    mparveen के द्वारा
    June 18, 2012

    निशा जी से पूरी तरह सहमत हूँ …..

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 18, 2012

    धन्यवाद परवीन जी…….सादर…

चन्दन राय के द्वारा
June 9, 2012

विक्रम साहब , आपकी दुर्घटनाओं से मिलने वाले फल को पढ़कर मुझे भी दुर्घटनाग्रस्त होने की ललक जाग उठी है , अब जागरण मच से टकराकर हलकी फुलकी चोट ही आई है ,सोच रहे की भैया इजिनीयर के प्राण पखेरू उड़ जाते और साहित्यकार का नव जीवन मिल जाता तो क्या बात थी , तो गुरुवर भेजिय कोई जोरदार दुर्घटना मेरे प्राण हरने को !

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    चन्दन जी…. आपकी चुटीली प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद…..

June 9, 2012

बहुत ही सुन्दर और तथ्यात्मक ढंग से भारत भूमि पर होने वाले दुर्घटनाओं को रखा है आपने………दिल गार्डेन-गार्डेन हो गया भैया जी………………………मगर मेरे गार्डेन से कोई फुल मत तोडियेगा……नॉट अलाऊ फॉर डाकू …………….क्योंकि जहा गोलिया चल रहीं हो वह फुल अक्सर मुरझा जाते हैं……………हार्दिक आभार………….!

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    अनिल जी…….आपका तहे-दिल से शुक्रिया…..


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