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जो तुमको हो पसंद....वही बात कहेंगे........

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प्रेम-पत्र...(love Letter)

Posted On: 6 Jun, 2012 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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2010-09-04_160258[1]
तुम्हें जान कहू या जाने-जिगर…………
मुझमें जो भी हो, बस तुम्हीं हो, …………….मेरी निगाहों में तेरा अक्स है, ……………मेरी साँसों में तेरी महक है, ……….पास रहकर भी कितना दूर हो मुझसे, क्या तडपाने की कसम खाई है तुमने,
फूल की नाजुक पंखुडिया चूमते हुए यही महसूस होता है….. मानो तुम्हारे होठों को चूम लिया है………कोई भूल से बहारों का ज़िकर कर दे तो, तुम्हारे खुले रेशमी बालों का ख़याल आ जाता है…………….सुबह की ओस की पहली बूँद भी इतनी पवित्र नहीं होती होगी, जितने तुम्हारे होठों की मुस्कान…………बहुत याद आते हैं, तुम्हारे खुल-खुल जाने वाले रेशमी बालों के झरने……….. आओ, आकर फिर से उन्ही गेसुओं की छांव में ले लो मुझे, अब और सब्र नहीं होता……….
तन्हा हूँ………..जुदाई का दर्द है न सीने में…………ऐसा लगता है………….मानो पेड़ से टुटा हुआ एक पत्ता हूँ मैं……….जिसे आंधियां उड़ा कर ले गयी हैं…………दूर बहुत दूर………….एक जलते तपते रेगिस्तान में…..डरता हूँ……….तन्हाईयों के रेगिस्तान में कहीं खो न जाऊं…….
ऐ मेरी आँखों के रंगीन सपने,………….तू कोई मर्गतृष्णा तो नहीं……..तो फिर क्यों सीने से उठती टीसें दर्द में घुल कर दिल को इस कद्र तडपा जाती हैं……जैसे, मानो किसी ने जलते हुए अंगारों पर रख दिया हो दिल को………
हवा बन कर आ जाओ, या खुशबु बन कर……..मेरे प्यार ने दामन बिछा रखा है…………
देखना……..ये इंतज़ार……..कहीं इंतज़ार ही न रह जाये……………

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62 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jeet Prajapati के द्वारा
May 30, 2016

Thank you dost patr likhna to koi aap se seekhe

amanatein के द्वारा
August 24, 2012

हाथ जोड़कर नमस्कार सर जी, पही बार आपके ब्लॉग पर आई हूँ,,पढ़ते ही दिल खुश हो गया…बहुत बहुत ही उम्दा..प्रेम पत्र लिखते लिखते आपने प्रेम कविता लिखने जो कोशिश की है अति उत्तम है और यक़ीनन मुझे आपकी कविता से प्रेम हो गया है..शुक्रिया..इतनी सुन्दर रचना के लिए…

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 24, 2012

    खुशामदीद…….अमानत जी…… आपका स्वागत है….. आपने रचना की तारीफ में इतना कुछ कह दिया कि अब हमारे कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं….. आप का दिल से शुक्रिया………..

Firdaus Khan के द्वारा
June 17, 2012

बहुत सुन्दर रचना है…लिखते रहिए…

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 17, 2012

    खुशामदीद……. आपका आगाज़ अच्छा लगा…… राफ्ता कायम रहे….इसी दुआ के साथ….

rahul panday के द्वारा
June 12, 2012

नहीं रहेगा इंतज़ार!!! अवश्य होगी मुलाकात….

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 12, 2012

    आमीन….. धन्यवाद राहुल जी……

D33P के द्वारा
June 10, 2012

प्रेम की खूबसूरत और प्रेम के प्रति समर्पित अभिव्यक्ति के साथ आपका स्वागत है

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 10, 2012

    ज़हे-नसीब….. आपका बहुत-बहुत शुक्रिया……

मनु (tosi) के द्वारा
June 10, 2012

आदरणीय विक्रम जीत जी , सादर ! क्या प्रेम पत्र लिखा है आपने ,,, पर देखना कहीं ये इंतज़ार इंतज़ार ही न रह जाये …. बहुत खूब !!

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 10, 2012

    आदरणीया मनु जी….नमस्कार… सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया…….

minujha के द्वारा
June 10, 2012

विक्रम जी नमस्कार प्रेमपत्र का अदभूत नमूना….,जितनी तारीफ करें कम होगी पर भाई साहब ..दीजिए वहीं जहां से कोई आस हो ,पत्थरों पर सर पटकने से सर तो अपना ही फूटना है……..,सुंदर प्रस्तुति

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 10, 2012

    आदरणीय मीनू जी….सादर नमस्कार…. जी बहन जी…..आपकी सलाह पर अवश्य गौर करेंगे….. सराहना के लिए धन्यवाद…..

    Delia के द्वारा
    October 17, 2016

    I forgot to mention James, I don’t read that rag (that’s the kindest terminology I could come up with) called the Washington Post since they fired Dan Froomkin for having the gall to tell the truth. That’s right folks, Dan Froomkin told the truth about Bush and Cheney and was fired by the Washington Post for saying it. The Washington Post doesn’t practice true journalism anymore, and if James and Simon were wise they would vacate that &#i8u0;p2blicat8onࢭ ASAP.

manjit के द्वारा
June 10, 2012

what a classical picture thanks

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 10, 2012

    thanks manjit…..

satish3840 के द्वारा
June 9, 2012

नमस्कार / अपने इतने दिल से लिखा हें तो इन्तजार क्यूँ रहेगा / काश ये मजबून हमें अपनी कोलिज के दिनों में मिला होता तो शायद हम भी लुका छिपी का खेल खेल लेते

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 9, 2012

    आदरणीय सतीश जी…नमस्कार…. चलो अच्छा हुआ…..आपकी पुरानी यादें ताज़ा हो गयीं….. धन्यवाद….

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 9, 2012

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति,विक्रम जी.बहुत अच्छा लगा भावनाओं को पोस्ट के रूप में ढालना.बस,इसी तरह लिखते रहें.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 9, 2012

    धन्यवाद राजीव जी……

rajpalsingh के द्वारा
June 9, 2012

vikram bhai, sat sri akal bahut vadhiya

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 9, 2012

    राजपाल जी…..सतश्री अकाल….. तारीफ़ करने का शुक्रिया…….

yamunapathak के द्वारा
June 8, 2012

विक्रमजी,आपकी रचना बहुत दिनों बाद पढ़ने को मिली. लघु रचना पर विस्त्रितता नभ की है .सुन्दर

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 9, 2012

    आदरणीय यमुना जी…. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

yogi sarswat के द्वारा
June 8, 2012

मित्रवर श्री विक्रमजीत सिंह जी , नमस्कार ! ख़ुशी हुई की आप इस मंच पर वापस आ गए हैं ! खूब जमेगा रंग , जब मिल बैठेंगे चार यार , मैं , आप , जेजे और आपका ब्लॉग ! आपने अपने ब्लॉग में प्यार में डूबे हुए इंसान की भावनाओं को जिस तरह से व्यक्त किया है , बहुत भावुक करता है ! ये इंतज़ार……..कहीं इंतज़ार ही न रह जाये……………उम्मीद है , इंतज़ार जल्दी ही ख़त्म होगा !

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 9, 2012

    मित्रवर योगी जी….नमस्कार…. आपकी उम्मीदें फलीभूत हों….यही दुआ करते हैं…. धन्यवाद….

rekhafbd के द्वारा
June 7, 2012

विक्रम जी ,प्रेम की सुंदर अभिव्यक्ति ,बधाई ,मंच पर आपका स्वागत है,लिखते रहिये ,आशीर्वाद

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    प्रिय बहन रेखा जी….नमस्कार…. हम कब से आपका इंतज़ार कर रहे थे….. आपका आना और आप का आशीर्वाद दोनों सर-माथे पर… ऐसे ही स्नेह बनाएं रखें………

smtpushpapandey के द्वारा
June 7, 2012

आदरणीय विक्रमजीत सिंह जी आपने जो मनोबल बढाया है और जो समर्थन दिया है उसके लिए हार्दिक धन्यवाद आपकी रचना भी पढ़ी अच्छी लगी कुछ देशहित में अच्छी रचनाएँ लिखें तो शायद और अच्छा लगेगा बाकी शुभकामनाओं सहित श्रीमती पुष्पा पाण्डेय

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    आदरणीय श्रीमती पुष्पा पांडे जी….. हम नतमस्तक हैं….. आपकी विचारधारा पर अवश्य अमल करेंगे…..

allrounder के द्वारा
June 7, 2012

नमस्कार भाई विक्रमजीत सिंह जी, वैसे तो अब प्रेम पत्र का ज़माना रहा नहीं फिर भी आपके इस प्रेम पत्र का जवाव नहीं ! :) बधाई आपको !

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    नमस्कार सचिन भाई….. आप तो जानते हैं….”ओल्ड इज गोल्ड” ये चीज़ें कभी पुरानी नहीं होती….. आपके सहयोग के लिए आपका धन्यवाद…….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 7, 2012

आदरणीय विक्रम जी, सादर अभिवादन, सुरमय , दर्द मय अभिव्यक्ति. बधाई प्रिय नाती श्री, शुभाशीष आज आपने अहसास कराया की आप बड़े हो रहे हैं. अभी तक भाई राज कमल जी की चिंता थी अब आपके बारे में भी विचार किया जायेगा. आज रात आपकी नानी से भी बात करूँगा.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    आदरणीय नाना श्री…. आपका आशीर्वाद हमारे लिए बहुमूल्य है…… और ये आशीर्वाद सदा हमारे ऊपर बना रहे….यही दुआ मांगते हैं……. चरणस्पर्श नाना श्री……..

Mohinder Kumar के द्वारा
June 7, 2012

विक्रम भाई आपकी भावपूर्ण रचना पढ कर मुझे दो पुराने नगमें याद आ गये. १. य़े मेरा प्रेम पत्र पढ कर… कि तुम नाराज न होना २. ये रेशमी जुल्फ़ें ये शरबती आंखे.. इन्हें देख कर जी रहें हैं सभी मेरी दिली तमन्ना है कि आपका ये इन्तजार सलामत हो और वो आयें. लिखते रहिये

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    आदरणीय मोहिंदर जी….सादर…. हमें भी कुछ याद आ गया….. ”आज नहीं दिल कल देंगे…भई…ऐसी भी क्या ज़ल्दी है…..” आपका आना सुखद रहा….

akraktale के द्वारा
June 7, 2012

विक्रमजीत जी नमस्कार, मन की तड़प को बहुत खूब सूरत अंदाज में आपने बयां किया है. मुझे तो आपके लिए यही गीत याद आ रहा है ” आवाज दे कहाँ है दुनिया मेरी जवां है………”

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    आदरणीय अशोक जी…सादर…. तो पूरा कीजिये ना…. ”आबाद मेरे दिल में…..उम्मीद का जहाँ है…..दुनिया मेरी जवां है…..”

dineshaastik के द्वारा
June 7, 2012

आदरणीय  विक्रम जी बहुत  ही सुन्दर प्रेम दर्शन  है आपके  प्रेम-पत्र में। यह तो एक  तरह का प्रेम शास्त्र ही है। प्रेम का चर्मोंत्कर्ष  स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है आपके प्रेम शास्त्र में। लेकिन भाई इसकी अतिशयता एक  रोग  का रूप  धारण  कर लेती है। ऐसा रोग  जो आदमी को निकम्मा  बना देती है। दुखों के कारागार में कैद कर देती है। जरा बचके, कहीं प्रेम पत्र  लिखते लिखते इसके शिकार बन जाय। चंदन जी, महिमा जी और अंकुर जी की तरह मैं भी सहमत  हूँ कि नवयुवक  निश्चित  ही इसकी नकल  करके अपनी प्रेमिका को आकर्षित  करने का प्रयास  करेंगे। भाई  जिसे प्रेषित  कर रहे हो, इशारों में उसका नाम  तो बता देते। http://dineshaastik.jagranjunction.com/ मृत्यु के पूर्व  और मृत्यु के बाद

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    आदरणीय दिनेश जी….सादर… आपका हमारे ब्लॉग पर आना ही बहुत बड़ी बात है…..आपके शुक्रगुजार हैं हम……. ”नाम क्यों बताएं……तस्वीर क्यों दिखाएँ…. लाये हैं हम कहीं से….किसी बेवफा की है….”

jlsingh के द्वारा
June 7, 2012

प्रिय विक्रम जी, सादर ! मेरा तो मन गदगद हो गया या कहें तो गार्डेन गार्डेन हो गया …… अब देखना यह है कि जिनके लिए यह प्रेम पत्र लिखा गया है उनपर क्या असर हुई जरूर बतलाइयेगा …… मन करता है बार बार पढूं ! बधाई और शुभकामना!

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    आदरणीय जवाहर जी…..सादर…. याद है आपको….”आ अब लौट चलें…” तो हम आ गए प्रभु….. ”तुम ने पुकारा…और हम चले आये…. दिल हथेली पर ले आये रे……………?” (कोई उठाये न उठाये…..????……) ”छेड़ा मेरे दिल ने….तराना तेरे प्यार का…. जिसने सुना खो गया…पूरा नशा हो गया….” कैसी रही प्रभु…..?????

    D33P के द्वारा
    June 10, 2012

    जरा हमें भी बताइयेगा ……….आपके इस प्रेमपत्र का हकदार कौन है ?

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 10, 2012

    ‘तलाश’ ज़ारी है…….बस…मिलते ही आपको खबर कर देंगे…….

    D33P के द्वारा
    June 10, 2012

    तो ये जनाब की तलाश के साथ. प्रेमपत्र लिखने की रिहर्सल चल रही है ?

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 11, 2012

    अभी छोटे हैं..तो….रिहर्सल तो करनी पड़ेगी…..हा….हा…..हा….

June 6, 2012

भैया जी, क्या आगाज है और क्या अंदाज है………………बहुत खूब. लगता है आपको किसी से इश्क हो गया है……………!

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    प्रिय अनिल जी….. धन्यवाद आपका…..आपका ये रूप बहुत अच्छा लगता है…… रही बात इश्क की…… ”हम वो नहीं रहे…..वो तबियत नहीं रही…” ये तो टाइम पास है….

June 6, 2012

विक्रम भैया, ये इश्क-विश्क मेरी समझ में थोडा कम आता है….आपको याद है न मेरी वो कविता “नहीं करूँगा…”, हाँ, वही….लेकिन चलिए आपने इतनी भावना के साथ लिखा है तो बधाई स्वीकार करें…….अगर इज़ाज़त हो तो मैं भी एक शेर कहता हूँ खुद का लिखा हुआ… खता हुई हो हमसे तो हमको बताइए चोरी-चोरी रूठ के हमें न सताइए, बस यही गुजारिश है आपसे हमारी बाहों में आये बिना नजरों में न आइये|

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    प्रिय गौरव जी….. करनी तो पड़ेगी भैया…….वहां भी कहा था..यहाँ भी कहेंगे…..लड्डू है…खाना तो पड़ेगा….नहीं तो सृष्टि का नुकसान करोगे….मेरे भाई….इसी बात पर दो शब्द….. ”क्या मजबूरियां हैं तुम्हारी…..बताती क्यों नहीं….? रहता हूँ तुम्हारे पड़ोस में…आतीं क्यों नहीं……….?” समझ गए बरखुरदार…….??????

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 6, 2012

विक्रम जी वाकई पूरी तरह से एक लव लेटर लिखा है आपने….श्रृंगार रस कूट-कूट कर भर दिया है आपने….बहुत बढ़िया

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    आपका सहयोग अति उत्तम है…….समीर जी….

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
June 6, 2012

विक्रम जी, सादर- बहुत ही खुबसूरत प्रेम पत्र prastut किया है आपने. अब युवाओं को कही और जाने की जरुरत ही नहीं. चन्दन जी के विचारों से पुर्णतः सहमत, बैसे प्रेम पत्र पड़कर मजा आ गया. अगर गर्ल फ्रेंड एक बार पडले तो, तो बस फ़िदा हो जाये.

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    प्रिय अंकुर जी….सादर… गर्ल फ्रंड से अधिक हमें आपकी चिन्ता है…मित्र…. आपका सहयोग अति उत्तम है….गर्ल फ्रंड से कहीं बढ़ कर….

Santosh Kumar के द्वारा
June 6, 2012

स्वागतम विक्रम भाई .सुन्दर रचना ..सादर नमस्ते

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    सप्रेम नमस्कार संतोष भाई…. आपके प्रयास का ही सुफल है…..

D33P के द्वारा
June 6, 2012

ये इंतज़ार…

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    सच कहा आपने……ये ‘इंतज़ार’ बहुत तड़पाता है हर इंसान को….. उफ़!!…..ये इंतज़ार….!!! ”बंद थीं आँखे किसी की याद में…… मौत आई….और धोखा खा गयी….”

MAHIMA SHREE के द्वारा
June 6, 2012

हाहा हा हा डाकू विक्रम सिंह जी … किस पे डाका डालने की ये तैयारी है ..:) वैसे मैं भी चन्दन जी से सहमत हूँ …. :)

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    महिमा जी….अब क्या कहें…आप तो बीती हुई बातों को ही पकड़ के बैठी हैं….हाँ ‘बाबा जी’ का पता नहीं….क्या जुगत लगा रहे हैं…..ख़ैर…आपका धन्यवाद…..ऐसे ही स्नेह बनाये रखिये….

चन्दन राय के द्वारा
June 6, 2012

विक्रम साहब, आपने तो कई युवाओं का काम आसान कर दिया ,उन्हें किसी से प्रेम पात्र लिखवाने की जरुरत नहीं , बस आपके प्रेम पत्र को कॉपी कर प्रेमिका को जा दे दे , और फिर कान्हा का और काहे का इन्तजार रहेगा कंही आपने इतने दिन यही काम तो नहीं किया , प्रेम के समाजसेवी जी !

    vikramjitsingh के द्वारा
    June 7, 2012

    चन्दन जी…नमस्कार… शुक्र है….आपका गुस्सा तो उतरा…..मेरे भाई…ये सब छोटी-छोटी बातें हैं…..इनको दिल पर नहीं लेते…आपका यहाँ आने का शुक्रिया….


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