Political

जो तुमको हो पसंद....वही बात कहेंगे........

15 Posts

762 comments

vikramjitsingh


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

राहुल गांधी…जवाब दो…

Posted On: 2 Mar, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Junction Forum पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

8 Comments

सौन्दर्य का आकर्षण….???

Posted On: 19 May, 2013  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

7 Comments

कौन कहता है..हम गरीब हैं……???

Posted On: 6 Sep, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

62 Comments

दर्द-ए-मोहब्बत……

Posted On: 4 Sep, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मस्ती मालगाड़ी में

46 Comments

आज की नारी…….

Posted On: 31 Aug, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (11 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

54 Comments

आज भी प्रासंगिक हैं चाणक्य-नीतियाँ……..

Posted On: 27 Aug, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

44 Comments

प्यासे दरिया……..

Posted On: 24 Aug, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

पॉलिटिकल एक्सप्रेस मस्ती मालगाड़ी में

54 Comments

गुदड़ी के लाल……

Posted On: 21 Aug, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

42 Comments

सुन्दर-कांड पाठ का रहस्य………

Posted On: 17 Aug, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (20 votes, average: 4.55 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

73 Comments

सभी पाठकों के सूचनार्थ

Posted On: 6 Jul, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

56 Comments

ऐ मेरे दोस्त…!!!

Posted On: 22 Jun, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (9 votes, average: 4.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मस्ती मालगाड़ी में

84 Comments

ये कैसी दुर्घटना…???

Posted On: 9 Jun, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (9 votes, average: 4.89 out of 5)
Loading ... Loading ...

पॉलिटिकल एक्सप्रेस मस्ती मालगाड़ी में

69 Comments

प्रेम-पत्र…(love Letter)

Posted On: 6 Jun, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (11 votes, average: 4.09 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मस्ती मालगाड़ी में

62 Comments

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

To Ivy:英文太屎,唔熟food pantry這個概念,是不是免費派糧的中心之類?在香港,我對這類設施沒有甚麼印象,或許是自己太孤陋寡聞也說不定。某些機構會做中介人聯絡商戶(如麵包舖)將即日賣剩的食物送往老人院或露宿者之家,這些計劃在性質上跟food pantry好像有點不同?如果說偶爾派派糧食也算food pantry,那麼香港至少有平安米…… = =;To ma0c5llabear:呵呵,要不是回到家裡有住家飯吃,我才不會搵命搏吃這樣的午飯。自己煮完帶飯當然是最抵的,不過也要有附設微波爐的固定辦公室才行&#1229r;旺角街市兩蚊斤菜,十蚊九個天津雪梨,以前我甚至試過在office煮麵食。剩下的雪梨還可以帶回去煲雪梨水&#6e292;加兩粒蜜棗,又甜又潤。

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा: डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश ) डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश )

के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

के द्वारा: जैनित कुमार वर्मा जैनित कुमार वर्मा

के द्वारा: akraktale akraktale

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

आदरणीय पीताम्बर जी.....सादर..... आपका प्रश्न उचित है.... लेकिन इस का उत्तर तो रोज़ अख़बारों - टीवी पर आ रहा है........ शायद आपको पता हो......ये बिलकुल वैसा ही है......जैसा विदेशों में पड़ा हुआ 'काला धन' जो हमारा होते हुए भी किसी काम का नहीं......अगर वो काला धन इस देश में वापिस आ जाए तो........क्या नहीं हो सकता.....दूर क्या जाना......अभी की बात करते हैं.....क्या आप जानते हैं....एक साल में 6 सिलेण्डर सब्सिडी वाले और उसके बाद बाज़ार भाव का सिलेण्डर लेने से केंद्र सरकार को 23,000 करोड़ की आमदन होगी........सिर्फ 23,000 करोड़.......और देखिये तो......विदेशों में भारत का 480 लाख करोड़ रूपया बट्टे खाते में पड़ा है.......आप सोच सकते हैं.....इतनी रकम से क्या नहीं हो सकता..........??? दूसरे शब्दों में यही कहा जायेगा.......कि देश की भृष्ट सरकार अगर ईमानदार हो जाये तो क्या नहीं हो सकता.....फिर आप का पडोसी भूखा नहीं सोयेगा....उसके बच्चे भी रोज़ स्कूल जायेंगे.......बस अगर आप साथ दें तो इन चोरों को पाठ पढ़ाने की आवश्यकता है....... उम्मीद है...आपकी जिज्ञासा का समाधान हो गया होगा....... सादर.......

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

विक्रम जीत जी, आपने न जाने कितनी मेहनत कर ये आंकड़े इकठे किये होंगे?आप को बहुत धन्यवाद.आपके लेख की सारी बातें सही हैं हमें तो यह बहूत ही अछा लगा. एक चल और एक अचल सम्पति होती है यह आप जानते ही होंगे! यह सम्पति जो आपने गिनाई है यह अचल है इसके होने से हमारा देश भले ही अमीर हो पर क्या ऐसा सही है? हम बिलकुल तब तक कंगाल कहे और माने जायेंगे जब तक मेरा पड़ोसी भूखा सोता है ,उसके बच्चे पैसे के अभाव में स्कूल नहीं जा सकते,इलाज के बिना मर जाते है.यह तो ऐसे हुआ जैसे तिजोरी में बाप के पास पैसा तो बहुत है पर मैं बेटा हो कर भी हाथ नहीं लगा सकता .हमारे मंदिरों की सम्पति तो बहुत है,हमारे बाबाओं की आमदनी तो बहुत है,सोना यूं ही पडा है पर जनता भूखी सोती है फिर हम,हमारा देश कैसे संपन्न हुआ? वही हुआ की - " सारा जहां हमारा पर रहने को घर ही नहीं है.माल सब हमारा हा पर हम उसे हाथ नहीं लगा सकते? हमन्याया सह कर कुछ कर ,कह नहीं सकते तो हम दीवार पर टंगी उस तसवीर की तरह नहीं हुए , जो न बोल सकती है और न ही हिल सकती है? बाबा राम देव हो हल्ला करते हैं क्यों नहीं पहले अपना धन किसी उत्पाद में लगा कर उधाहरण पेश नहीं करते?

के द्वारा: pitamberthakwani pitamberthakwani

के द्वारा: renukajha renukajha

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

सादर प्रणाम! समय की मांग के अनुसार उपयुक्त और विश्लेष्णात्मक आलेख................अंधों को आख देता हुआ अगर वो लेना चाहें तो वरना..........................जीवन गति तोरी तेवन गति मोरी रामा हो रामा..............रामा कैसे मिति भारत से भ्रष्टाचरवा ..............रामा हो रामा.............चाहे जनता हो या जनार्दन..........सब इंहा चोरवा...............रामा हो रामा..................! रामा ...नेता, अभिनेता, संत और लंठ...सब एक समनवा ..रामा हो रामा.................रामा.........राम के भेष में छुपल रावनवा .................रामा हो रामा..........................! टिंग टांग...ताना नाना नंग..........पिचंग पिचंग पिचंग.................हाँ..............हाँ.....हाँ..................... जय हो भरता माता की ...........जय हो इस धरती के नमक हराम और नालायक सपूतों की .....................! इसी के साथ हरिकीर्तन ख़त्म हुआ...........एक बार प्रेम से बोलिए ....................महान संस्कृति और सभ्यता वाले भारत भूमि की ...................................................

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

आदरणीय! संभव है कुछ लोग मेरी बात से सहमत न हों,,किन्तु मेरा मानना ये है कि जब दान की गई वस्तुओं का उपयोग भगवान भक्तों के लिए नहीं होता है तो हम ही क्यूँ न किसी पात्र को दान दे,,फिर वो चाहे ब्राम्हण हो या कोई निन्म जाति का हो. "मेरे दादा जी कहा करते थे, कि व्यक्ति को किसी मंदिर-मस्जिद जाने कि जरूरत नहीं वो घर पर पूजा-पाठ अपने श्रद्धानुसार कर सकता है, तो एक दिन मैंने पूंछा अगर जाने की जरूरत नहीं है तो फिर मंदिर क्यूँ बनाये गए? इस उन्होंने बहुत ही अच्छा उत्तर दिया जिसे मैं भी मानता हूँ,,मंदिर सिर्फ इसलिए बनाये गए ताकि जब व्यकि को कहीं पर्यटन करने का मन करेगा तो वह किसी मंदिर जाएगा और वहाँ बैठे गरीबों को कुछ दान करेगा, इससे वह पुन्य का भागी भी होगा और किसी गरीब का हित भी हो जाएगा. बहुत अच्छा लेख धन्यवाद...

के द्वारा: ashishgonda ashishgonda

भाई विक्रम जी धर्म और राजनीति यह दो ऐसे क्षेत्र हैं लूटने के कि इसमें न तो लुटने वाला आह भर सकता है और न ही लूटने वाला का कोई कुछ बिगाड़ सकता है। वर्तमान परिवेश में इन दोनों क्षेत्रों में अपराधी प्रवृति के लोगों का अधिपत्य है। निराशाराम जैसे दबंग, अनिर्मल बाबा जैसे ठग, राम कीहींग जैसे बालात्कारियों का कोई कुछ भी नहीं विगाड़ सकता। यह सभी धर्मों में है। चूँकि हिन्दु धर्म में पारदर्शिता एवं एक तरह का लोकतंत्र है। अतः यहाँ सब बातें खुल जातीं हैं। और इनकी खुलकर आलोचना भी हो जाती है। कोई मसलमान इस्लाम के बारे में सच्चाई बोल कर देखे। आतंकवादी उसके सिर कलम करने के लिये इनाम लगा देंगी। अन्य धर्मों में इससे भी अनैतिकता, भ्रष्टाचार, अधर्म एवं झूठ है। हमारे धर्म का पैसा तो केवस अय्यासी में खर्च होता है। अन्य सम्प्रदायों का धन तो आतंकवाद एवं देशद्रोही कार्यों में खर्च होता। अभी हाल में मुम्बई में जो उत्पात हुआ उसमें धार्मिक फंड का इस्तेमाल किया गया था। मेरा मानना है कि वर्तमान परिवेश में यह धर्म ही मानव का सबसे बड़ा शत्रु है। क्या हम बिना धर्म के नैतिक एवं ईमानदार नहीं बन सकते?

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: अजय यादव अजय यादव

नमस्कार विक्रम जीत जी ,चलो कोई तो मिला जो महिलाओ की तारीफ करे वर्ना मनोरंजन ठाकुर जी का ब्लॉग " मिस्ड कॉल मारो ना" पड़कर मन त्रस्त हो गया !आपकी इस तारीफ में हम खुशवंत जी द्वारा महिलाओ की तारीफ में कसे गए चंद कसीदे जोड़ देते है - महिलाओं की तारीफ में : हम महिलाओं को जो कुछ देते हैं उसके बदले में वे हमें उससे ज्यादा ही लौटाती हैं यदि आप उन्हें प्यार दें तो वे आपको संतान देती हैं यदि आप उन्हें मकान दें तो वे आपको घर देती हैं यदि आप उन्हें अनाज दें तो वे आपको भोजन देती हैं यदि आप उन्हें मुस्कराहट दें तो वे आपको अपना दिल दे देती हैं हम उन्हें जो कुछ भी दें बदले में वे हमें कुछ ज्यादा ही लौटाती हैं इसलिए यदि हम उन्हें कोई छोटी-मोटी तकलीफ दें तो हमें एक बहुत बड़ी मुसीबत के लिए तैयार रहना चाहिए। Source: खुशवंत सिंह(सौजन्य : कर्नल विनय नरूला, नई दिल्ली)

के द्वारा: D33P D33P

के द्वारा: MAHIMA SHREE MAHIMA SHREE

के द्वारा:

आदरणीय शर्मा जी.....सादर.... आपका हमारे ब्लॉग पर स्वागत है.....आपके मन के बोझ को हम समझ सकते हैं.......आप से सिर्फ एक ही बात कहना चाहेंगे.......अगर आपने गीता पढ़ी होती तो आप ये सवाल ही ना करते.....अब आप ये मत कहना कि गीता भी एक ढकोंसला है, वो कलयुग का ग्रन्थ है....और आज भी हर हिन्दू परिवार में मरते हुए इंसान को गीता का पाठ ही सुनाया जाता है.....खासकर गीता का 18वां अध्याय.....गीता में ये स्पष्ट लिखा हुआ है...''जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान्....'' अगर कर्मों+नियति का लेखा-जोखा ना होता तो भगवान राम को 14 वर्ष का बनवास क्यों झेलना पड़ता....??? उनके साथ भी तो हनुमान थे.....फिर ऐसा क्या हुआ....??? जो उन को इतने कष्ट उठाने पड़े......??? क्या कहेंगे आप इस पर.....??? और एक बात......33 करोड़ देवता क्या करेंगे.......??? जब माना जाता है कि भगवान तो इंसान के अन्दर ही होता है...तो बाहर क्या है....??? आपने वो बात भी सुनी होगी....''वो खेत में मिलेगा....खलिहान में मिलेगा.....भगवान तो ऐ बन्दे.......इंसान में मिलेगा.......'' तो गिला किस से प्रभु......हर इंसान अपने कर्मों का फल भुगत रहा है........और ये सदा चलता रहा है....और चलता रहेगा.......और एक बात.....हनुमान जी को मुसलमान क्यों नहीं मानते....तो ना माने..क्या फर्क पड़ता है....हिन्दू और सिक्ख तो मानते हैं....(हम भी सिक्ख हैं और पंजाब से हैं...) और आप तो खुद हिन्दू हो.....क्या आपको नहीं पता...एक मात्र अमर देवता हैं हनुमान जी......कभी....जिंदगी में....''श्री सालासर धाम या श्री मेहंदीपुर धाम (राजस्थान) में जाकर देखिये....आँखें ना खुल जाएँ आपकी तो फिर कहियेगा.....??? साक्षात् रूप में विराजमान मिलेंगे आपको हनुमान जी.....लेकिन भक्तों के दुःख दूर करने के लिए......किसी से लड़ने के लिए नहीं....... उम्मीद है...आपकी शंका का समाधान हो गया होगा........ समालोचक प्रतिक्रिया के लिए आप का हार्दिक धन्यवाद....सादर शर्मा जी.......

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

  दोस्त ये मन का खेल  है इस से अ्धिक कुछ नही  पूजाा से मन एकाग्र होता है बाकी सब अन्ध विसवास हैभागवत पुराण का स्कंध 4 अध्याय11 श्लोक17 व राम चरित मानसस की शुुरू की220 चौपाई पढो बाकी कथा वर्णन है मानो या न मानो आपकी मरजी अगर हनुमानमे इतनी ताकत थी तो मुसलिम  हमलावर  क्यो आए क्यो इतनेदिन से हिन्दू गुलाम  हैं हनुमान  ने क्यो नही मारे  क्यो रोज  हिन्दू मारे जाते हैं   अपने देस मे ही बेघर कर दिये हनुमान को मुसलमान तो मानते नही  सिर्फ हिन्दू मानते हैं किस सटेज पर  रक्षा कीी सोचोो जरा क्यो कोई देवता ऱक्षा नही करतासंकट मोचन मन्दिर पर हमला क्यो हनुमान  अपने मन्दिर की रक्षा नही कर सका इसी अन्धविसवास ने गुलाम बनवाया पुन  हिन्दुओ मे 33 करोड देवता एक अरब हिन्दू एक देवता के हिस्से  तीन हिन्दू वह देवता तीन हिन्दू का कष्ट दूर नही कर सकता उल्टा हमे उनके घर बनवाने  पूपडते हैं व उनकी रक्षा करनी पडती है

के द्वारा: snsharmaji snsharmaji

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

के द्वारा: aman kumar aman kumar

के द्वारा: satish3840 satish3840

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

मोना जी – विक्रमजीत सिंह जी और उनके मित्र के रोड एक्सीडेंट वाले इस दुखद समाचार को आपके मुख (कलम ) से सुन कर मन बहुत ही दुखी हुआ है ....क्योंकि उनके मित्र के ठीक होने में काफी वक्त लग सकता है –राड पड़ने की भी संभावना है - लेकिन यह जान कर मन को कुछ तसल्ली भी हुई की एक हफ्ते बाद ही आपके “बॉस” हम सभी के बीच दुबारा से विराजमान होंगे .... अभी फ़िलहाल आप इनका ख्याल ठीक से रखियेगा – वैसे आपके बयानों से ऐसा लग रहा है की हमारे प्रिय विक्रमजीत सिंह जी को मामूली हेयर लाइन फ्रैक्चर हुआ है या फिर किसी पसली या मासपेशी में खिचाव और चोट आई है ..... इस का मैं खुद भुक्त भोगी हूँ ..... दस दिन में हेयर लाइन फ्रैक्चर सिर्फ *arflur -3d and becadexamane capsules के सेवन से ठीक हो गया था ..... मेरी शुभकामनाये साथ ही समझिए

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा:

ऐ दोस्त मेरी तरह बेवफाई सहने वाले, उसे भूल  जाओ   मुझसे कहने वाले, कहना तो आसान, पर भुलाना नहीं होता, सच्ची मुहब्बत करने वालों का जमाना नहीं होता, मुहब्बत में बेवफा की याद की जो सजा पाता है, ये वो नशा है जिसमें बहुत मजा आता है, सच्ची मुहब्बत  निभाने के लिये नहीं होती, दिवानों के लिये है जमाने के लिये नहीं होती, भुलाने की कोशिश  भी याद करने का बहाना है, ऐसे तो बहुत ही मुश्किल  उसे भूल  पाना है, वो तो रुलायगा ही जिसका काम  रुलाना है, वो क्यों रुलायगा उसे जो जिसका दिवाना है, दोस्त इसलिये उदास  हूँ कि उसने चोट दी, दिल  तोड़ा नहीं हैं, हकीकत  मैं छोड़  दिया यादों में छोड़ा नहीं है। विक्रम  जी आपकी सुन्दर रचना के लिये समर्पित  उपरोक्त पंक्तियाँ.....

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

के द्वारा:

विक्रमजीत जी आपका बहुत बहुत स्वागत है ,आपकी वापसी बहुत प्रेममयी अभिव्यक्ति से साथ हुई और आपकी दूसरी रचना उसके बिलकुल विपरीत भावों की है !मगर बहुत खूबसूरत और आज के राजनितिक हालत पर व्यंग करती !यहाँ सभी दुर्घटना से बचे हुए लोग आते है जिनके दुर्घटना के बाद कुछ पुर्जे सरके हुए और हिले हुए होते है ..अब आप ही बताइए ये क्या देश को संभालेंगे जो खुद दुर्घटना ग्रस्त है .बेचारे मनमोहन सिंह देश की अर्थव्यवस्था के चक्कर में अपनी अर्थव्यस्था भी भूल गए और आ गए मैडम की शरण में ..जो अब उनकी अर्थव्यवस्था को अपने इशारे पर चला रही है ! आपने बिलकुल सही कहा ये सरकार दुर्घटनाग्रस्त लोगो का अस्पताल है !यहाँ से इनके जीवाणु निकल कर पूरे देश की व्यवस्था को संक्रमित कर रहे है जब तक ये पूरा अस्पताल संक्रमण मुक्त नहीं हो पाता हालत नहीं सुधर सकते ........ आपको बधाई आपकी उत्कृष्ट रचना के लिए

के द्वारा: D33P D33P

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

के द्वारा:

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: vikramjitsingh vikramjitsingh

के द्वारा:

आदरणीय  विक्रम जी बहुत  ही सुन्दर प्रेम दर्शन  है आपके  प्रेम-पत्र में। यह तो एक  तरह का प्रेम शास्त्र ही है। प्रेम का चर्मोंत्कर्ष  स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है आपके प्रेम शास्त्र में। लेकिन भाई इसकी अतिशयता एक  रोग  का रूप  धारण  कर लेती है। ऐसा रोग  जो आदमी को निकम्मा  बना देती है। दुखों के कारागार में कैद कर देती है। जरा बचके, कहीं प्रेम पत्र  लिखते लिखते इसके शिकार बन जाय। चंदन जी, महिमा जी और अंकुर जी की तरह मैं भी सहमत  हूँ कि नवयुवक  निश्चित  ही इसकी नकल  करके अपनी प्रेमिका को आकर्षित  करने का प्रयास  करेंगे। भाई  जिसे प्रेषित  कर रहे हो, इशारों में उसका नाम  तो बता देते। http://dineshaastik.jagranjunction.com/ मृत्यु के पूर्व  और मृत्यु के बाद

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: D33P D33P




latest from jagran